Farrukhabad News: भांजी को बचाने के लिए गंगा में कूदे पूर्व सैनिक, तेज धार में बहे; घंटों तलाश के बाद भी नहीं मिला सुराग

फर्रुखाबाद: जनपद के पांचाल घाट पर रविवार को मानवता, साहस और रिश्तों की मिसाल पेश करने वाला एक दर्दनाक हादसा सामने आया। डूब रही भांजी की जान बचाने के लिए गंगा में छलांग लगाने वाले 60 वर्षीय पूर्व सैनिक रामशंकर खुद तेज धाराओं की चपेट में आकर लापता हो गए। घटना के बाद घाट पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस और स्थानीय गोताखोर देर शाम तक उनकी तलाश में जुटे रहे।

जानकारी के अनुसार, कादरी गेट थाना क्षेत्र के शिवाजी नगर निवासी पूर्व सैनिक रामशंकर अपने रिश्तेदारों के साथ पांचाल घाट स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम के सामने गंगा स्नान करने पहुंचे थे। उनके साथ हाथरस और पुणे से आई उनकी भांजियां संध्या, सुशीला और सुधा भी परिवार सहित मौजूद थीं।

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स्नान के दौरान अचानक उनकी भांजी सुशीला गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं। भांजी को संकट में देखकर रामशंकर ने बिना अपनी जान की परवाह किए तुरंत गंगा में छलांग लगा दी। उन्होंने बहादुरी और सूझबूझ का परिचय देते हुए सुशीला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन इसी दौरान वह खुद गंगा की तेज धारा और गहराई में फंस गए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक एक बार रामशंकर का सिर पानी के ऊपर दिखाई दिया, लेकिन कुछ ही क्षणों बाद वह गंगा की लहरों में ओझल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया और परिजन बदहवास होकर मदद की गुहार लगाने लगे।

सूचना पर पहुंची कादरी गेट पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की सहायता से तत्काल खोज अभियान शुरू कराया। कई घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बावजूद देर शाम तक उनका कोई पता नहीं चल सका। पुलिस का कहना है कि गोताखोरों की मदद से लगातार तलाश की जा रही है।

बताया गया कि रामशंकर के तीन बेटे हैं। इनमें से दो भारतीय सेना में देश सेवा कर रहे हैं, जबकि एक निजी क्षेत्र में कार्यरत है। उनकी पत्नी फिलहाल छत्तीसगढ़ में सेना में तैनात अपने बेटे के पास रह रही हैं। रिश्तेदारों के आने पर रामशंकर उनके साथ गंगा स्नान के लिए पांचाल घाट पहुंचे थे।

पूर्व सैनिक के इस साहसिक बलिदान ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं। अपनी भांजी की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं की। पूरे क्षेत्र में उनके साहस और त्याग की चर्चा हो रही है, जबकि परिजन गंगा किनारे उनकी सलामती की आस लगाए बैठे हैं।

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