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लघुकथा: बारिश ने दिखा दी सही राह
बरेली। बारिश का मौसम कितना सुकून भरा होता है। आसमान से गिरती बूंदें केवल धरती की प्यास ही नहीं बुझातीं, बल्कि कई बार मन के भीतर जमा दुख, गुस्सा और उलझनों को भी बहा ले जाती हैं। आज मंदाकिनी जी भी इसी एहसास से गुजर रही थीं। कुछ देर पहले तक उनका मन बेचैनी, गुस्से और असमंजस से भरा हुआ था, लेकिन बारिश की ठंडी फुहारों ने जैसे उनके विचारों को नई दिशा दे दी थी।
मंदाकिनी जी घबरा गईं। उन्होंने तुरंत पूछा, “लेकिन क्यों बेटा, आखिर ऐसी क्या बात हो गई?”
कुछ क्षणों की खामोशी के बाद जिया ने दर्द भरी आवाज में कहा, “नीरव का एक ऑस्ट्रेलियाई महिला के साथ संबंध है। शादी के एक सप्ताह बाद ही मुझे इस बात का पता चल गया था। मैंने सोचा था कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात और खराब होते गए। अब वह अपना ज्यादातर समय उसी महिला के साथ बिताता है। मेरी जिंदगी पूरी तरह बिखर चुकी है और अब मुझे लगता है कि नीरव से अलग होकर ही मैं खुद को फिर से संभाल पाऊंगी।”
यह सुनकर मंदाकिनी जी के पैरों तले जमीन खिसक गई। पहले तो उन्हें अपनी बहू की बातों पर विश्वास नहीं हुआ। अपने बेटे के चरित्र पर सवाल सुनकर वह क्रोधित हो उठीं और जिया को ही गलत ठहराने लगीं।
लेकिन जब मन थोड़ा शांत हुआ तो यादों की परतें खुलने लगीं। उन्होंने नीरव को बड़े प्यार और संस्कारों के साथ पाला था। उसकी हर इच्छा पूरी की थी। जब उसने ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ाई करने की इच्छा जताई थी, तब उन्होंने अपने अकेलेपन की परवाह किए बिना उसे आगे बढ़ने दिया।
कुछ महीने पहले ही उन्होंने बड़े अरमानों से नीरव की शादी जिया से कराई थी। जिया पढ़ी-लिखी, संस्कारी और समझदार लड़की थी। मंदाकिनी जी ने खुद उसे अपने बेटे के लिए चुना था। शादी के बाद दोनों ऑस्ट्रेलिया चले गए और उन्हें लगा कि बेटे की जिंदगी अब खुशहाल है।
लेकिन सच जानने के लिए उन्होंने नीरव को फोन किया। नीरव ने बेपरवाही से कहा, “हां मां, लूसी मेरी गर्लफ्रेंड है। जिया ने बेवजह इस बात को बड़ा मुद्दा बना दिया है। ऑस्ट्रेलिया में यह सब सामान्य है, लेकिन जिया पुरानी सोच की बातें करती है।”
बेटे की बातें सुनकर मंदाकिनी जी अंदर तक टूट गईं। उन्हें एहसास हुआ कि ऊंची उड़ान भरते हुए उनका बेटा रिश्तों की मर्यादा, जिम्मेदारी और संवेदनाओं से बहुत दूर निकल चुका है।
कुछ देर तक वह बालकनी में खामोश खड़ी रहीं। बारिश की बूंदें उन्हें भिगोती रहीं और शायद उनके मन का भ्रम भी धोती रहीं। उसी पल उन्हें समझ आ गया कि बेटे के गलत फैसले की कीमत वह अपनी बहू की जिंदगी से नहीं चुकाने देंगी।
उन्होंने तुरंत जिया को फोन किया और दृढ़ स्वर में कहा—
“जिया, मैं तुम्हारे साथ हूं। तुम्हें अपनी जिंदगी अपने आत्मसम्मान और अपनी खुशियों के अनुसार जीने का पूरा अधिकार है।”
उस दिन बारिश केवल मौसम में नहीं हुई थी, बल्कि उसने एक मां के मन में छाए भ्रम को भी धोकर उसे सही रास्ता दिखा दिया था।
