नाबालिग से दुष्कर्म में BJP विधायक को 25 साल की कैद, 10 लाख जुर्माना

UP News : उत्तर प्रदेश की दुद्धी विधासभा सीट से भाजपा विधायक को दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया गया है। इसके लिए भाजपा विधायक रामदुलार गोंड़ को 25 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही उन्हें 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भी सुनाई गई है। कोर्ट ने सजा का ऐलान करते हुए दोषी विधायक पर 10 लाख 10 हजार रूपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड ना दे सकने की स्थिति में विधायक को तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी पड़ेगी।

9 वर्ष पूर्व एक नाबालिग लड़की को डरा-धमका कर दुष्कर्म किए जाने के मामले की सुनवाई शुक्रवार को अपर जिला जज प्रथम/ एमपी एमएलए कोर्ट सोनभद्र एहसानुल्लाह खान की अदालत ने की। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दुद्धी विधानसभा सीट से विधायक रामदुलार गोंड़ को पॉक्सो एक्ट में दोषी पाते हुए 25 वर्ष की कैद, जिसमें 20 वर्ष कठोर कारावास तथा 10 लाख 10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर विधायक को तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी पड़ेगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं, अर्थदंड की समूची धनराशि पीड़िता को मिलेगी। वहीं अब दोषी पाए जाने के बाद विधायक की सदस्यता भी खत्म हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो दुद्धी में नए सिरे से विधानसभा चुनाव कराने पड़ेंगे।

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पीड़ित पक्ष के मुताबिक 4 नवंबर 2014 को  म्योरपुर थाने में दी तहरीर में एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि वह शाम को 7 बजे अपने घर पर था, तभी उसकी नाबालिग बहन रोती हुई आई। पूछने पर उसने बताया कि भईया मैं आपको मुंह दिखाने लायक नहीं बची हूं। उसने बताया कि रामदुलार गोंड पुत्र रामधनी निवासी रासपहरी, थाना म्योरपुर, जिला सोनभद्र जो तत्कालीन प्रधानपति थे अब वर्तमान में भाजपा के दुद्धी विधायक हैं उसकी नाबालिग बहन के साथ पिछले एक वर्ष से लगातार जान मारने की धमकी देकर दुष्कर्म कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने रामदुलार के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था और विवेचना करने के बाद विवेचक ने चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की थी। 

25 वर्ष कैद की सजा
अदालत ने सुनवाई करते हुए पॉक्सो एक्ट में दोषसिद्ध पाकर दोषी दुद्धी विधायक रामदुलार गोंड़ को 25 वर्ष की कैद, जिसमें 20 वर्ष की कठोर कैद तथा 10 लाख 10 हजार रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। वहीं अर्थदंड की समूची धनराशि पीड़िता को मिलेगी। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील सत्यप्रकाश त्रिपाठी एवं सहयोगी अधिवक्ता विकास शाक्य व रामजियावन सिंह यादव ने बहस की। 

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