यूपी बजट आंकड़ों का इंद्रधनुष, जमीनी हकीकत से दूर: रामगोविंद चौधरी

बलिया: उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश बजट 2026-27 को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने “आंकड़ों का इंद्रधनुष और हकीकत की धुंध” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता की वास्तविक समस्याओं के समाधान के बजाय चुनावी वादों और आकर्षक घोषणाओं पर केंद्रित है।

चौधरी ने कहा कि सरकार बजट को अब एक वित्तीय दस्तावेज के बजाय “इवेंट” की तरह पेश कर रही है, जहां बड़े आंकड़े और रिकॉर्ड का दावा किया जाता है, लेकिन उसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे और बड़ी परियोजनाओं के प्रचार के बीच ग्रामीण सड़कों, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

यह भी पढ़े - सुलतानपुर: क्लोन ट्रेडिंग ऐप से करोड़ों की ठगी का खुलासा, असम और मुंबई से 7 आरोपी गिरफ्तार

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि 10 लाख रोजगार देने की घोषणा पहले भी कई बार की जा चुकी है, लेकिन सरकारी भर्तियां रुकी हुई हैं और युवा भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और परिणामों के इंतजार में भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बेरोजगारी के आंकड़े जमीनी सच्चाई को नहीं दर्शाते।

किसानों के मुद्दे पर चौधरी ने कहा कि बजट में मुफ्त बिजली और रिकॉर्ड भुगतान के दावे किए जा रहे हैं, जबकि गन्ना किसानों का बकाया अब भी करोड़ों रुपये में है। उन्होंने आरोप लगाया कि एमएसपी पर खरीद, फसल बीमा और कृषि ढांचे को लेकर बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है और कृषि के लिए आवंटन कुल बजट का 9 प्रतिशत से भी कम है।

महिलाओं से जुड़ी घोषणाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि शादी में एक लाख रुपये, स्कूटी और टैबलेट जैसी योजनाएं चुनावी लाभ के लिए की गई घोषणाएं हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा, पुलिस सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान नहीं किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि बजट में बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च का दावा किया गया है, लेकिन पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उनके अनुसार, विकास का लाभ कुछ शहरी क्षेत्रों तक सीमित है।

रामगोविंद चौधरी ने कहा कि यह बजट “कागजी घोषणाओं और जुमलों” पर आधारित है और इससे रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों और युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने इसे चुनाव से पहले लाया गया “लुभावन लेकिन खोखला बजट” बताया।

खबरें और भी हैं

Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.