पठन संस्कृति को प्रोत्साहन देगी सनबीम स्कूल बलिया की कम्युनिटी लाइब्रेरी, जानिए इसकी विशेषताएँ

बलिया। सनबीम स्कूल बलिया के नालंदा पुस्तकालय में गुरुवार को अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के लिए कम्युनिटी पुस्तकालय का उद्घाटन किया गया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीटीओ डॉ. आनंद दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

अपने संबोधन में डॉ. आनंद दुबे ने कहा कि जिस समाज में पढ़ने की संस्कृति होती है, वह समाज अधिक जागरूक और संवेदनशील बनता है। यह कम्युनिटी लाइब्रेरी बौद्धिक विकास का केंद्र बनेगी। उन्होंने कहा कि इंटरनेट सूचना तो देता है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और संस्कार पुस्तकों से ही प्राप्त होते हैं।

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कार्यक्रम में शहर के कई प्रतिष्ठित विद्वान और साहित्यकार उपस्थित रहे। लेखक एवं कवि डॉ. जनार्दन राय, डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय, डॉ. कादम्बिनी सिंह, डॉ. गणेश पाठक तथा टीडी कॉलेज के डॉ. जैनेंद्र पांडेय ने अपने विचार साझा किए। विद्यालय सचिव श्रीवत्स सिंह, निदेशक डॉ. कुंवर अरुण सिंह और प्रधानाचार्या डॉ. अर्पिता सिंह ने सभी अतिथियों को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

विद्यालय निदेशक डॉ. कुंवर अरुण सिंह ने पुस्तकालय और पठन-पाठन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एक अच्छी लाइब्रेरी समाज की बौद्धिक प्रगति की आधारशिला होती है। यह पुस्तकालय न केवल विद्यार्थियों, बल्कि अभिभावकों के लिए भी ज्ञान का केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में लोग पुस्तकों से दूर होते जा रहे हैं, जबकि किताबें सूचनाओं का सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं। नियमित पठन से सोचने-समझने की क्षमता विकसित होती है। जैसे शरीर के लिए व्यायाम आवश्यक है, वैसे ही मस्तिष्क के लिए पढ़ना सबसे अच्छी कसरत है। अधिक पढ़ने से भाषा और शब्दों पर पकड़ मजबूत होती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है और विचार अधिक प्रभावी ढंग से व्यक्त होते हैं। उन्होंने अभिभावकों से लाइब्रेरी का नियमित उपयोग करने का आग्रह किया।

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विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. अर्पिता सिंह ने सभी अतिथियों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब अभिभावकों में पढ़ने की आदत विकसित होती है, तो उसका सीधा और सकारात्मक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। उन्होंने पठन-पाठन को मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास के लिए अनिवार्य बताया।

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इस अवसर पर उपस्थित अभिभावकों और विद्यार्थियों ने लाइब्रेरी में उपलब्ध पुस्तकों का अध्ययन किया। अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे बलिया के लिए गौरवपूर्ण कदम बताया और कहा कि यह कम्युनिटी लाइब्रेरी समाज में पठन संस्कृति को पुनः स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

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