बीमारी की सही पहचान से सुरक्षित इलाज तक: इंदौर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 के पहले दिन पेशेंट सेफ्टी और नवाचार पर गहन मंथन

इंदौर। मध्य प्रदेश में पहली बार डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखकर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का इंदौर में प्रभावशाली शुभारंभ हुआ। लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह (डीएवीवी) में आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन के पहले दिन का फोकस इस बात पर रहा कि सही जांच, सुरक्षित प्रक्रियाएं और आधुनिक तकनीकें मिलकर मरीजों के इलाज को कैसे अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बना सकती हैं। मरीज के अस्पताल में प्रवेश से लेकर उपचार पूरा होने तक सुरक्षा के हर पहलू पर गंभीर और व्यापक चर्चा की गई।

मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य सेवा संगठनों के संघ (काहो) द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से 1500 से अधिक स्वास्थ्य सेवा और डायग्नोस्टिक क्षेत्र के विशेषज्ञों, प्रोफेशनल्स और छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम में लोकसभा सांसद शंकर लालवानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस अवसर पर क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और काहो के बीच समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए।

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लोकसभा सांसद शंकर लालवानी ने अपने संबोधन में कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सही जांच और सुरक्षित डायग्नोस्टिक प्रक्रिया बेहद जरूरी है। उन्होंने इस आयोजन को इंदौर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि जब लगभग 70 प्रतिशत चिकित्सीय निर्णय जांच रिपोर्ट्स पर आधारित होते हैं, तब डायग्नोस्टिक की गुणवत्ता और सुरक्षा सीधे तौर पर मरीज के जीवन से जुड़ जाती है।

कार्यक्रम की शुरुआत काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन की सेक्रेटरी एवं सेंट्रल लैब, इंदौर की संस्थापक निदेशक डॉ. विनिता कोठारी के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। उन्होंने कहा कि काहो डायग्नोस्टिकॉन इसलिए खास है क्योंकि यहां गुणवत्ता को केवल नियम नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। यदि यहां से जुड़े सभी लोग गुणवत्ता की सोच को अपने संस्थानों तक ले जाते हैं, तो यह आयोजन अपने उद्देश्य में सफल होगा।

इसके बाद काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन की चेयरमैन डॉ. अपर्णा जयराम के स्वागत संबोधन के साथ काहो एंथम प्रस्तुत किया गया। दीप प्रज्वलन समारोह में स्वास्थ्य, डायग्नोस्टिक और अकादमिक जगत के कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिसने सम्मेलन की गंभीरता और महत्व को और बढ़ाया।

पहले दिन कुल 13 तकनीकी और विचारात्मक सत्र आयोजित किए गए। इनमें “डायग्नोस्टिक्स में पेशेंट सेफ्टी 2026: सही जांच से सुरक्षित इलाज तक”, लैब्स में नेतृत्व और मानसिक स्वास्थ्य, कैंसर डायग्नोस्टिक्स में बायोमार्कर की भूमिका, माइक्रोबायोलॉजी में उन्नत तकनीकों का उपयोग, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, ब्लड सेफ्टी, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से गुणवत्ता सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी सत्रों से यह संदेश साफ तौर पर सामने आया कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण डायग्नोस्टिक व्यवस्था ही मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली की नींव है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. डी. पी. लोकवानी ने कहा कि काहो और एनएबीएल के बीच शुरू हुआ सहयोग अपने आप में ऐतिहासिक है और यह देश में डायग्नोस्टिक सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल आज की जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिशा तय कर रहा है।

काहो ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों में पेशेंट सेफ्टी से जुड़ी प्रशिक्षण सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि सुरक्षित देखभाल हर स्तर पर सुनिश्चित हो सके। देशभर से मिले 1600 से अधिक पंजीकरण इस बात का प्रमाण हैं कि काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 डायग्नोस्टिक समुदाय के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय मंच बन चुका है।

पहले दिन की चर्चाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत में सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मरीज-केंद्रित डायग्नोस्टिक व्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

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