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इंदौर में सजेगी धार-झाबुआ-अलीराजपुर की आदिवासी संस्कृति, ‘जात्रा-2026’ से होगा सीधा परिचय
इंदौर। किसी भी संस्कृति को समझने का सबसे सशक्त माध्यम उसे नज़दीक से महसूस करना होता है। इसी उद्देश्य के साथ इंदौर में पहली बार धार, झाबुआ और अलीराजपुर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को शहरवासियों के सामने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इस विशेष आयोजन का नाम है ‘जात्रा-2026’, जो आदिवासी जीवन, परंपरा और लोककला से सीधा संवाद स्थापित करेगा।
धार, झाबुआ और अलीराजपुर—तीनों जिले अपनी विशिष्ट आदिवासी पहचान के लिए जाने जाते हैं। कहीं भगोरिया पर्व की उमंग है, कहीं सादगी भरा जीवन, तो कहीं लोककला और परंपराओं की गहरी जड़ें। ‘जात्रा-2026’ इन सभी रंगों को एक मंच पर लाकर शहर के लोगों को आदिवासी संस्कृति को केवल देखने नहीं, बल्कि महसूस करने का अवसर देगा।
जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने बताया कि इस आयोजन में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। महोत्सव में 100 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जहाँ आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजन, हस्तशिल्प और अन्य सामग्री उपलब्ध रहेगी। आयोजन का प्रमुख आकर्षण पिथोरा आर्ट गैलरी होगी, जिसमें 25 से अधिक चित्रों के माध्यम से आदिवासी आस्था, प्रकृति और जीवनशैली को दर्शाया जाएगा। इसके अलावा, हमू काका बाबा न पोरिया से जुड़े आनंदीलाल भावेल अपने नृत्य दल के साथ लाइव प्रस्तुति देंगे।
समिति के कोषाध्यक्ष गिरीश चव्हाण ने बताया कि इस अवसर पर मालवा-निमाड़ क्षेत्र के उन आदिवासी प्रतिभाओं का भी सम्मान किया जाएगा, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इनमें सोशल मीडिया, सिनेमा और कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तथा पद्मश्री से सम्मानित व्यक्तित्व भी शामिल होंगे। ‘जात्रा-2026’ जनजातीय लोककला, बोली, परंपरा और पहचान के संरक्षण व संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
महोत्सव में आदिवासी कलाकारों की कला और हस्तशिल्प प्रदर्शनी, पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी। भगोरिया पर्व पर आधारित फोटोग्राफी प्रदर्शनी आदिवासी समाज के उत्सव, प्रेम और सामूहिक जीवन को चित्रों के माध्यम से सामने लाएगी। साथ ही जनजातीय साहित्य और पारंपरिक परिधानों से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे।
‘जात्रा-2026’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज को समझने और उससे संवाद करने का प्रयास है। यही कारण है कि यह आयोजन अपने स्वरूप में न केवल इंदौर, बल्कि देश में भी एक अनूठी पहल माना जा रहा है।
‘जात्रा-2026’ के प्रमुख आकर्षण
जनजातीय कलाकारों की कला एवं हस्तशिल्प प्रदर्शनी
आदिवासी समाज के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल
विभिन्न अंचलों के जनजातीय और लोकनृत्य
पिथोरा आर्ट गैलरी
भगोरिया पर्व पर आधारित फोटो प्रदर्शनी
जनजातीय साहित्य और परिधानों के स्टॉल
तीन दिन तक चलने वाला यह महोत्सव यह संदेश देगा कि आधुनिकता की दौड़ में भी हमारी सांस्कृतिक जड़ें आज भी जीवित हैं और उन्हीं जड़ों में भारत की असली पहचान बसती है।
