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बलिया में सरयू का कहर: कई मकान नदी में समाए, सैकड़ों परिवारों पर मंडराया संकट; कटान पीड़ितों का धरना जारी
बलिया। सरयू नदी का कटान बैरिया और बांसडीह क्षेत्र में लगातार भयावह होता जा रहा है। बैरिया तहसील के गोपालनगर टाड़ी और बांसडीह क्षेत्र के कई गांवों में नदी की तेज धार से मकान और खेत नदी में समा रहे हैं। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और कटान रोकने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी जारी है।
बैरिया के गोपालनगर टाड़ी में तीन मकान नदी में समाए
ग्रामीण अपने घरों को स्वयं तोड़कर ट्रैक्टरों के जरिए सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं। कटान पीड़ितों का कहना है कि पिछले चार वर्षों में करीब 375 मकान नदी में समा चुके हैं। उनका आरोप है कि बाढ़ विभाग द्वारा प्लास्टिक की बोरियों में मिट्टी डालने जैसे अस्थायी उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन कटान नहीं रुक रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में स्थित एक मोबाइल टावर समेत करीब 250 मकानों पर भी खतरा बना हुआ है।
कटान रोकने की मांग पर दूसरे दिन भी धरना
गोपालनगर-वशिष्ठ नगर सीमा पर कटान रोकने की मांग को लेकर दूसरे दिन भी सैकड़ों ग्रामीण पीपल के पेड़ के नीचे धरने पर बैठे रहे। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द प्रभावी कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आमरण अनशन करेंगे।
बांसडीह में भी बढ़ा खतरा, 27 जुलाई को तहसील घेराव की चेतावनी
उधर, बांसडीह क्षेत्र में भी सरयू नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ कटान तेज हो गया है। महाराजपुर, सुल्तानपुर, खादीपुर, भोजपुरवा, चांदपुर और ताहिरपुर गांवों के सामने किसानों की उपजाऊ जमीन नदी में समा रही है।
महाराजपुर में करीब ₹9 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे अधिकांश कटानरोधी ठोकर (कटर) पानी में डूब गए या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बोल्डर पिचिंग और अन्य सुरक्षात्मक कार्य भी प्रभावित हुए हैं।
छात्र संघर्ष समिति के संयोजक एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य नागेंद्र बहादुर सिंह 'झून्नू' ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए घोषणा की है कि यदि सोमवार तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो 27 जुलाई को हजारों ग्रामीणों के साथ बांसडीह तहसील का घेराव किया जाएगा।
उन्होंने बाढ़ विभाग के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कटान प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल प्रभावी बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।
