बलिया: सरयू कटान से भोजपुरवा गांव अस्तित्व के संकट में, 200 परिवारों पर विस्थापन का खतरा

बांसडीह (बलिया)। टीएस बंधा के किनारे स्थित भोजपुरवा गांव सरयू नदी के तेज कटान की चपेट में आकर अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। नदी अब आबादी से महज 50 मीटर की दूरी पर पहुंच गई है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि गांव में बनी जल निगम की पानी की टंकी भी कभी भी नदी में समा सकती है। वहीं, गांव का प्राथमिक विद्यालय पहले ही कटान की भेंट चढ़ चुका है।

गांव के पूर्वी टोले में रहने वाले लोग अपने कच्चे-पक्के मकान, झोपड़ियां और करकट स्वयं तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। पश्चिमी टोले में भी कुछ परिवार अस्थायी डेरा बनाकर अपने पशुओं के साथ रह रहे हैं।

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प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार एवं अधिकारियों की टीम ने गांव का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों का सर्वे शुरू किया है। अब तक करीब 200 परिवारों को चिह्नित किया गया है, जिनमें 150 परिवारों का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि शेष 50 परिवारों का सर्वे जारी है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन का पूरा ध्यान केवल मुआवजे और विस्थापन की औपचारिकताओं तक सीमित है, जबकि कटान रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा। उनका कहना है कि पिछले वर्ष टिकुलिया दियर में कटान से प्रभावित परिवारों को भी अब तक न तो मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास के लिए जमीन उपलब्ध कराई गई।

इस बीच सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी की तेज धार सुल्तानपुर, खादीपुर, ताहिरपुर और महाराजपुर के किसानों की कृषि भूमि को भी तेजी से काट रही है। कटान के चलते गांव में मवेशियों के लिए चारा और पेयजल का संकट भी गहराता जा रहा है।

ग्रामीण हीरालाल यादव, भृगु यादव, जवाहीर यादव, कुंती देवी, राजेंद्र यादव, ललन यादव, जितेंद्र यादव, वीरेंद्र यादव, रविंद्र यादव, सतेंद्र यादव, गौतम यादव, मुन्ना, बलिराम यादव और श्रीकिशुन यादव सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस सहायता नहीं मिली है। उन्होंने सिंचाई विभाग से तत्काल कटान रोकने के उपाय करने और विस्थापित परिवारों के समुचित पुनर्वास की मांग की है।

वर्तमान में भोजपुरवा के कई परिवार जयनगर, सारंगपुर, पर्वतपुर, सुल्तानपुर, खादीपुर और ताहिरपुर सहित आसपास के गांवों में शरण लेने को मजबूर हैं, जहां उन्हें भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है।

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