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बलिया के तहसीलदार अतुल हर्ष निलंबित, नामांतरण वादों के निस्तारण में लापरवाही का आरोप
बलिया। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 34 के तहत दाखिल नामांतरण वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में तहसील सदर, बलिया के तहसीलदार अतुल हर्ष को शासन ने निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी प्रस्तावित की गई है।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि शासन ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही बरतने पर जवाबदेही तय की जाएगी।
राजस्व से जुड़े मामले सीधे तौर पर किसानों, जमीन मालिकों और आम लोगों से जुड़े होते हैं। नामांतरण जैसे मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने से संबंधित लोगों को अपनी संपत्ति से जुड़े कामों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसी को देखते हुए सरकार राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के जल्द निस्तारण पर जोर दे रही है।
निलंबन अवधि में मिलेगा जीवन निर्वाह भत्ता
शासनादेश के अनुसार, निलंबन अवधि में तहसीलदार अतुल हर्ष को वित्तीय नियम संग्रह खंड-2, भाग-2 से 4 के मूल नियम-53 के प्रावधानों के तहत जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। यह राशि अर्द्ध वेतन पर देय अवकाश वेतन के बराबर होगी।
नियमों के अनुसार, जीवन निर्वाह भत्ते पर महंगाई भत्ता भी अनुमन्य होगा, यदि वह संबंधित अवकाश वेतन पर देय है। इसके अलावा निलंबन की तारीख को प्राप्त वेतन के आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निर्धारित शर्तों के तहत दिए जा सकेंगे।
हालांकि, इन मदों का भुगतान संबंधित अधिकारी द्वारा प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद ही किया जाएगा। प्रमाण-पत्र में उन्हें यह घोषित करना होगा कि निलंबन अवधि के दौरान वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार, वृत्ति या व्यवसाय में संलिप्त नहीं हैं।
निलंबन के साथ ही अतुल हर्ष के खिलाफ विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। अब विभागीय जांच में नामांतरण वादों के निस्तारण में कथित लापरवाही से जुड़े तथ्यों और जिम्मेदारी का निर्धारण किया जाएगा।
