गंगा-सरयू के बढ़ते जलस्तर से बढ़ा बाढ़ का खतरा, गांवों में घुसने लगा पानी

मझौवां, बलिया। गंगा और सरयू नदियों के जलस्तर में बढ़ाव का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। गंगा का जलस्तर उच्चतम बिंदु के करीब पहुंचने से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। शुक्रवार को गंगा का जलस्तर 59.870 मीटर दर्ज किया गया, जो वर्ष 2016 के उच्चतम जलस्तर 60.390 मीटर से महज 52 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि, कुछ देर बाद जलस्तर स्थिर होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार रात से गंगा के जलस्तर में कमी आने की उम्मीद है। पिछले वर्ष गंगा का अधिकतम जलस्तर 59.910 मीटर तक पहुंचा था। ऐसे में इस बार जलस्तर 59.870 मीटर तक पहुंचने के बाद ग्रामीणों को पिछले साल का रिकॉर्ड टूटने की आशंका सताने लगी है।

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बाढ़ के पानी के चलते बड़ी संख्या में जलीय जीव-जंतु और सांप सुरक्षित स्थानों की तलाश में आबादी की ओर निकल रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

दियारांचल में पहुंचा बाढ़ का पानी

गंगा और सरयू के लगातार बढ़ते जलस्तर से मुरली छपरा विकासखंड के दियारांचल में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। कोड़रहा नौबरार ग्राम पंचायत के भगवान टोला टिपूरी गांव में बाढ़ का पानी मुख्य रास्तों तक पहुंच गया है। करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव में घरों में पानी घुसने का खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार मुख्य मार्ग पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। कई लोग अपने मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। बैजनाथ यादव, देवनाथ साह, दुर्गा यादव, शत्रोहन सिंह और हवलदार सिंह ने बताया कि पानी लगातार गांव की ओर बढ़ रहा है।

वहीं, चांददियर पंचायत में भी सरयू की बाढ़ का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत की करीब 70 फीसदी आबादी प्रभावित हो चुकी है। फतेह राय, पियारी के डेरा, बैजनाथ बाबा के डेरा, बकुल्हा, पलटू नगर और चक्की चांददियर समेत कई पुरवों में बाढ़ का पानी पहुंच गया है।

ग्रामीणों ने नावों की कमी और बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की गैरमौजूदगी का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में नावें उपलब्ध कराने, बाढ़ चौकियों पर नियमित कर्मचारियों की तैनाती और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है।

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