इस कारण से बाबा रामदेव की फार्मेसी का 14 दवाएं बेचने का लाइसेंस रद्द कर दिया गया

नई दिल्ली : दवाओं के भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद उत्तराखंड के आयुर्वेद एवं यूनानी विभाग ने योगगुरु बाबा रामदेव की दिव्य फार्मेसी व पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की है। विभाग के राज्य औषधि अनुज्ञापन अधिकारी ने दिव्य फार्मेसी व पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की 14 औषधियों के लाइसेंस निलंबित करते हुए उनके निर्माण पर रोक लगा दी है। उक्त दवाओं में ब्लड प्रेशर, मधुमेह, ग्लूकोमा, उच्च कोलेस्ट्राल आदि की दवाएं शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि आयुर्वेद के दिव्य फार्मेसी के जिन उत्पादों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं उनमें श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, दिव्य ब्रोंकोम, श्वासारि प्रवाही, श्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, बीपीिग्रट, मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईिग्रट गोल्ड और पतंजलि दृष्टि आई ड्रॉप शामिल हैं।

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गौरतलब है कि पतंजलि आयुर्वेद के भ्रामक विज्ञापन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान रामदेव, कंपनी के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण और कंपनी को फटकार लगाई थी। रामदेव और बालकृष्ण ने माफी भी मांगी थी। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, हरिद्वार ने भ्रामक विज्ञापनों को लेकर दिव्य फार्मेसी व पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में बाद भी दायर किया है, जिसकी सुनवाई दस मई को होनी है।

दरअसल, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने भी इस मामले को लेकर याचिका दायर की हुई है, जिसपर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रही है। आइएमए का तर्क है कि पतंजलि ने आयुर्वेदिक दवाओं से कुछ बीमारियों के इलाज का भ्रामक दावा किया है। कोर्ट ने इस मामले में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण को सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा था। वहीं, राज्य औषधि अनुज्ञापन अधिकारी को भी कड़ी फटकार लगाई थी। 

पतंजलि फूड्स को जीएसटी बकाया के लिए कारण बताओ नोटिस
पतंजलि फूड्स को जीएसटी खुफिया विभाग ने कारण बताओ नोटिस भेजा है, जिसमें कंपनी से यह बताने को कहा गया है कि उससे 27.46 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट क्यों नहीं वसूला जाना चाहिए। 26 अप्रैल को कंपनी की ओर से नियामक को दी गई जानकारी के अनुसार, उसे जीएसटी इंटेलिजेंस महानिदेशालय, चंडीगढ़ जोनल यूनिट से मिले नोटिस में यह भी कहा गया है कि कंपनी पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।

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