वट सावित्री व्रत आज : अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए सुहागिन महिलाएं करें पूजन

बलिया : भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए किए जाने वाले व्रतों में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व इस वर्ष 16 मई 2026 को मनाया जाएगा।

अमृतपाली निवासी ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर के अनुसार, यह व्रत धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यता है कि वटवृक्ष यानी बरगद के मूल में ब्रह्मा, मध्य भाग में भगवान विष्णु और अग्रभाग में भगवान शिव का वास होता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह वृक्ष वातावरण को शुद्ध करने और हानिकारक गैसों को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पंडित आदित्य पराशर ने बताया कि वटवृक्ष की तरह अक्षय और दीर्घायु जीवन की कामना से महिलाएं यह व्रत रखती हैं। उन्होंने कहा कि अमावस्या के दिन प्रातः स्नान कर विधिवत व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद वटवृक्ष के नीचे बैठकर बांस के पात्र में सप्तधान्य रखकर सावित्री-सत्यवान की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करना चाहिए। पूजा के दौरान वृक्ष के चारों ओर सूत लपेटते हुए परिक्रमा की जाती है।

उन्होंने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार मद्रदेश की राजकुमारी सावित्री ने अपने तप, निष्ठा और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इतना ही नहीं, यमराज ने प्रसन्न होकर सत्यवान के अंधे माता-पिता की दृष्टि और उनका खोया हुआ राज्य भी लौटा दिया था।

पंडित आदित्य पराशर ने कहा कि शास्त्रों के अनुसार सधवा, विधवा अथवा अपुत्रा— हर नारी को अपने परिवार के कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत करना चाहिए।

वट सावित्री व्रत की सरल पूजन विधि

व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।

नए वस्त्र धारण कर सोलह श्रृंगार करें।

वटवृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें तथा गुड़, चना, फल, अक्षत और पुष्प चढ़ाएं।

वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण या पाठ करें।

बरगद के वृक्ष के चारों ओर लाल अथवा पीला धागा बांधकर परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें।

पूजन के बाद घर के बड़ों का आशीर्वाद लें।

इस दिन सुहाग सामग्री, मिट्टी का घड़ा, पंखा, अन्न और फल का दान करना शुभ माना जाता है।

व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं को काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए।

ज्योतिर्विद आचार्य पंडित आदित्य पराशर ने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया वट सावित्री व्रत परिवार में सुख, समृद्धि और आरोग्य का संचार करता है।

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