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मेनका गांधी के बयान के विरोध में फ्रांस और इटली में भारतीय दूतावासों को सौंपा गया ज्ञापन
पेरिस (फ्रांस), जून 2026। पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा जैन संतों एवं जैन समाज को लेकर दिए गए कथित बयान के विरोध में दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। यह ज्ञापन फ्रांस और इटली स्थित भारतीय दूतावासों को सौंपा गया, जिसमें बयान को निराधार, भ्रामक और जैन समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मोरपंख का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट में भी मोरपंख सुशोभित रहता है। बुंदेलखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति में भी दीपावली के अवसर पर ग्रामीण जंगलों में स्वाभाविक रूप से गिरे मोरपंख एकत्र कर पारंपरिक नृत्य करते हैं, जो प्रकृति के प्रति सम्मान और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
पंडित सुधीर शर्मा ने कहा कि यह बयान केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि विश्वभर के सनातन प्रेमियों की भावनाओं को भी आहत करने वाला है। उन्होंने मेनका गांधी से जैन समाज से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त क्षमा मांगने और अपना बयान वापस लेने की मांग की। साथ ही भारत सरकार से आग्रह किया कि धार्मिक आस्थाओं को प्रभावित करने वाले भ्रामक एवं तथ्यहीन बयानों पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस अवसर पर दद्दा जी इंटरनेशनल कल्चर सेंटर, मतंगेश्वर सेवा समिति खजुराहो, आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्यगण, अर्हम ध्यान योग के सदस्य, बागेश्वर धाम शिष्य मंडल, इंडो-यूरोपियन बिजनेस काउंसिल के पदाधिकारी, इंजीनियर सुरेंद्र गुप्ता, माधुरी गुप्ता, लोक कलाकार रईस भारती, योग शिक्षिका कैथी लोहेते, ओशो संन्यासी, ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के सदस्य सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
