रामराज कॉटन ने ‘पंचा’ लॉन्च कर ओडिशा की संथाली बुनाई परंपरा को दिया नया जीवन

कानपुर, अगस्त 2026: भारत की पारंपरिक हैंडलूम विरासत को आधुनिक पहचान देने की दिशा में काम करते हुए रामराज कॉटन ने ‘पंचा’ नाम से अपनी नई हैंडलूम पेशकश लॉन्च की है। इस कलेक्शन में ओडिशा के मयूरभंज की पारंपरिक संथाली बुनाई को आधुनिक धोती के रूप में पेश किया गया है।

‘पंचा’ के जरिए कंपनी का उद्देश्य देश की कम चर्चित बुनाई परंपराओं को व्यापक पहचान दिलाना और इस कला को पीढ़ियों से जीवित रखने वाली आदिवासी महिला बुनकरों के लिए नए आजीविका अवसर तैयार करना है।

रामराज कॉटन के संस्थापक एवं चेयरमैन के. आर. नागराजन ने कहा कि भारत की हैंडलूम विरासत बेहद विविध है, लेकिन कई खूबसूरत बुनाई परंपराएं आज भी सीमित समुदायों तक ही सिमटी हुई हैं। मयूरभंज की संथाली बुनाई को उन्होंने ऐसी ही अनमोल विरासत बताया।

उन्होंने कहा कि ‘पंचा’ के माध्यम से पारंपरिक बुनाई को धोती के नए स्वरूप में पेश किया गया है, ताकि इस शिल्प को व्यापक बाजार और नई पहचान मिल सके। साथ ही, इससे जुड़ी कला और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में भी मदद मिले।

आदिवासी महिला बुनकरों की कला को मिला नया मंच

संथाली आदिवासी समुदाय की महिलाएं पारंपरिक रूप से इस विशिष्ट बुनाई से साड़ियां तैयार करती रही हैं। हालांकि संरक्षण की कमी, बदलती जीवनशैली और सीमित बाजार अवसरों के कारण यह परंपरा पिछले कई दशकों में धीरे-धीरे अपनी पहचान खोती गई।

इसी विरासत को ध्यान में रखते हुए ‘पंचा’ के जरिए संथाली बुनाई को धोती के रूप में नया स्वरूप दिया गया है। इससे पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने और इसे तैयार करने वाली महिला बुनकरों की आजीविका को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

100% कॉटन और पारंपरिक बुनाई तकनीक

‘पंचा’ में पारंपरिक बुनाई की खासियतों को बरकरार रखा गया है। प्रत्येक उत्पाद 100% कॉटन से हाथ से बुना जाता है। इसमें ऑफ-व्हाइट बेस, एजो-फ्री रंग, साधारण बुनाई और एक्स्ट्रा-वेफ्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

कंपनी के मुताबिक, इन विशेषताओं के जरिए पीढ़ियों से चली आ रही संथाली बुनाई की शिल्पकला और पहचान को बनाए रखने की कोशिश की गई है।

‘पंचा’ 7 अगस्त 2026 से चुनिंदा रामराज कॉटन एक्सक्लूसिव स्टोर्स और ऑनलाइन उपलब्ध है।

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