दिल्ली के रामलीला मैदान में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन, अध्यादेश की मांग तेज

नई दिल्ली। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जाने के विरोध में शनिवार को राजधानी के रामलीला मैदान में देशभर से बड़ी संख्या में शिक्षक जुटे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने केंद्र सरकार से मांग की कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाया जाए और संसद में कानून बनाकर पुराने शिक्षकों को राहत दी जाए। आज के इस प्रदर्शन में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के शिक्षक संगठनों ने हिस्सा लिया।

प्रदर्शन के दौरान शिक्षक “TET अनिवार्यता वापस लो”, “शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो” और “शिक्षक बचाओ-शिक्षा बचाओ” जैसे नारे लगाते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को अचानक TET पास करने का आदेश देना उनके अनुभव और सेवा का अपमान है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मान और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा की लड़ाई है।

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शिक्षक संगठनों के नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देशभर के 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं, जबकि अकेले उत्तर प्रदेश में करीब 1.87 लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। उनकी मांग है कि 23 अगस्त 2010 (आरटीई लागू होने से पहले) नियुक्त शिक्षकों को TET अनिवार्यता से पूरी तरह छूट दी जाए।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को अपने फैसले में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से अधिक समय बचा है, उन्हें 31 अगस्त 2027 तक TET पास करना होगा, अन्यथा सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई हो सकती है। इसी आदेश के विरोध में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया।

शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द राहत नहीं दी, तो आंदोलन को और तेज करते हुए संसद घेराव किया जाएगा।

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