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'ज़्यादा बाग़ी' या सिर्फ़ गलत समझी गई पीढ़ी? जेन ज़ी की सोच को दिखाएगा स्टार प्लस का 'ये फितूर तेरा'
मुंबई। बदलते दौर में जेन ज़ी अपनी बेबाक सोच, सवाल पूछने की आदत और अपनी पहचान को लेकर पहले से अधिक मुखर नजर आ रही है। सोशल मीडिया से लेकर कॉलेज कैंपस तक युवा अपनी बात खुलकर रख रहे हैं। इसी बदलती सोच और भावनाओं को केंद्र में रखकर स्टार प्लस अपना नया शो 'ये फितूर तेरा' लेकर आ रहा है।
निर्माताओं के अनुसार, आज के दर्शक ऐसे किरदारों से अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं जो पूरी तरह परफेक्ट नहीं होते, बल्कि अपनी कमजोरियों, गलतियों और भावनाओं के साथ वास्तविक नजर आते हैं। यही वजह है कि आज की कहानियों में मानवीय और परतदार किरदारों को अधिक महत्व मिल रहा है।
शो का मुख्य किरदार जीत पारंपरिक टीवी हीरो से अलग है। वह भावुक है, कई बार जिद्दी भी है और अक्सर दिल से फैसले लेता है। वहीं सौम्या एक ऐसी युवती है, जो नई परिस्थितियों में अपने आत्मविश्वास और पहचान की तलाश कर रही है। दोनों किरदार मिलकर आज के युवाओं के अनुभवों और चुनौतियों को सामने लाते हैं।
स्टार प्लस का मानना है कि वर्षों तक पारिवारिक कहानियों के लिए पहचाने जाने के बाद यह शो युवाओं की दुनिया, कॉलेज जीवन और उनकी बदलती मानसिकता को केंद्र में रखकर एक नया प्रयोग है।
'ये फितूर तेरा' की कहानी यह संदेश देने का प्रयास करती है कि किसी व्यक्ति को 'बाग़ी', 'जिद्दी' या 'बहुत भावुक' कहने से पहले उसकी परिस्थितियों और भावनाओं को समझना भी जरूरी है। शो आज की पीढ़ी की उम्मीदों, सपनों और आत्म-अभिव्यक्ति को पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
