इंटरनेशनल फादर्स डे पर सोनी सब के कलाकारों ने साझा की पिता से मिली अनमोल सीख

मुंबई, जून 2026: हर सफल इंसान की कहानी के पीछे अक्सर उसके पिता का त्याग, समर्थन और मार्गदर्शन छिपा होता है। इंटरनेशनल फादर्स डे के खास मौके पर सोनी सब के कलाकार मनीष वाधवा, इक़बाल खान, तोरल रसपुत्रा, अर्जुन पुंज, मुस्कान बामने और नितिन बाबू ने अपने पिताओं से जुड़ी खास यादें और उनसे मिली जीवन की सीख साझा की। कलाकारों ने बताया कि कैसे उनके पिता ने मुश्किल समय में उनका साथ दिया, आत्मविश्वास बढ़ाया और जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सिखाए।

इक़बाल खान, जो ‘यादें’ में डॉ. देव मेहता की भूमिका निभा रहे हैं, ने कहा कि पिता बनने के बाद उन्हें अपने पिता के त्याग और जिम्मेदारियों की गहराई को समझने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें ईमानदारी, धैर्य और दूसरों के प्रति सम्मान का महत्व सिखाया, जिसे वे अपनी बेटियों को भी देना चाहते हैं।

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अर्जुन पुंज, जो ‘यादें’ में डिग्गी का किरदार निभा रहे हैं, ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि उनके पिता हमेशा उनकी बातें ध्यान से सुनते थे और उन्हें महत्व देते थे। आज एक पिता के रूप में वे भी अपने बच्चों के साथ वही प्यार और अपनापन साझा करने की कोशिश करते हैं।

मुस्कान बामने, जो ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया की भूमिका निभा रही हैं, ने कहा कि उनके पिता हमेशा उनके सबसे बड़े समर्थक रहे हैं। स्कूल के कार्यक्रमों से लेकर अभिनय के ऑडिशन तक, उन्होंने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया और विश्वास दिलाया कि वह कुछ भी हासिल कर सकती हैं।

नितिन बाबू, जो ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में चिराग पटेल की भूमिका निभा रहे हैं, ने बताया कि उनके पिता ने बिना ज्यादा शब्दों के अपने कर्मों से उन्हें मेहनत और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास ही सफलता की असली कुंजी है।

मनीष वाधवा, जो ‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह का किरदार निभा रहे हैं, ने कहा कि वास्तविक जीवन में पिता बनने और पर्दे पर एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाने से उन्हें पिता के प्रेम, धैर्य और जिम्मेदारी को और करीब से समझने का अवसर मिला।

तोरल रसपुत्रा, जो ‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती की भूमिका निभा रही हैं, ने बताया कि उनके पिता की चुपचाप मौजूदगी और समर्थन ने उन्हें हमेशा मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि मेहनत और समर्पण शब्दों से कहीं ज्यादा प्रभाव छोड़ते हैं।

सोनी सब के कलाकारों की ये भावनात्मक यादें इस बात को दर्शाती हैं कि पिता केवल परिवार की जिम्मेदारी निभाने वाले व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन के सबसे बड़े शिक्षक और प्रेरणास्रोत भी होते हैं।

‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ जैसे मनोरंजक कार्यक्रम देखने के लिए जुड़े रहिए सिर्फ सोनी सब के साथ।

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