एसुस और विद्या इंडिया की डिजिटल साक्षरता पहल से एक साल में 14 हजार से अधिक छात्र, युवा और महिलाएं लाभान्वित

मुंबई : एसुस इंडिया ने विद्या इंडिया (एनजीओ) के साथ मिलकर अपने डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम का एक वर्ष पूरा होने का जश्न मनाया। इस पहल का उद्देश्य उन समुदायों तक तकनीक की पहुंच बढ़ाना है, जहां पहले इसकी पहुंच सीमित रही है, साथ ही लोगों को भविष्य के लिए जरूरी डिजिटल स्किल्स सिखाना भी इसका मुख्य लक्ष्य है।

इस कार्यक्रम के तहत अब तक महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा में करीब 13 हजार बच्चों और 650 युवाओं तक पहुंच बनाई गई है। इसके अलावा 1100 से अधिक महिलाओं को भी डिजिटल जागरूकता और प्रशिक्षण से जोड़ा गया है।

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पिछले एक वर्ष में इस पहल को लोगों से काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अलग-अलग केंद्रों पर औसतन 82 प्रतिशत से अधिक उपस्थिति दर्ज की गई, वहीं छात्रों के साथ-साथ स्थानीय समुदाय की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

वर्तमान में यह कार्यक्रम 19 प्रोजेक्ट्स में संचालित हो रहा है, जहां प्रशिक्षित स्टाफ और ट्रेनर्स की मदद से बच्चों को नियमित रूप से प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उनकी सीखने की प्रगति पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है।

एक तय पाठ्यक्रम और संरचना के तहत कंप्यूटर लैब्स की स्थापना, एसुस विवोबुक की उपलब्धता और साप्ताहिक अध्ययन योजना के माध्यम से डिजिटल शिक्षा दी जा रही है।

इसमें छात्रों को बेसिक से लेकर एडवांस डिजिटल स्किल्स सिखाई जा रही हैं, जिनमें एमएस ऑफिस टूल्स, स्क्रैच और पाइथन जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, डिजिटल सेफ्टी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नई तकनीकों की समझ शामिल है।

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एसुस के साउथ एशिया रीजनल डायरेक्टर एरिक ओ ने कहा, “पिछले एक वर्ष में विद्या के साथ हमारी साझेदारी का फोकस उन समुदायों तक डिजिटल शिक्षा पहुंचाने पर रहा है, जहां पहले तकनीक की पहुंच सीमित थी। आज जो प्रगति दिख रही है, वह यह स्पष्ट करती है कि जमीनी स्तर पर लगातार काम करना कितना जरूरी है।”

उन्होंने कहा कि यह पहल क्लासरूम से लेकर करियर तक लोगों को उपयोगी डिजिटल स्किल्स सिखाने और लंबे समय तक सकारात्मक प्रभाव बनाए रखने का प्रयास है।

इस कार्यक्रम से कई लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आए हैं। वापी के आर.एन. हाई स्कूल के कक्षा 10 के छात्र कृष झा ने इस पहल के जरिए डिजिटल टूल्स, एआई की बेसिक समझ और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी हासिल की।

कृष झा ने बताया, “इस डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम ने मेरी पढ़ाई और रोजमर्रा के काम आसान बना दिए हैं। अब मैं जानकारी ढूंढने, होमवर्क करने और डिजिटल टूल्स इस्तेमाल करने में ज्यादा सहज हूं। जब मैंने खुद से एक प्रोजेक्ट बनाया, तो मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया।”

इसी तरह गोवा की ममता लमानी और कीर्ति राठौड़ ने बेसिक कंप्यूटिंग और एमएस ऑफिस की ट्रेनिंग के आधार पर डीमार्ट में कैशियर की नौकरी हासिल की और साथ ही अपनी पढ़ाई भी जारी रखी।

यह पहल स्किल सीखने और उसे रोजगार में बदलने के बीच मजबूत संबंध को दर्शाती है।

अब एसुस और विद्या इंडिया इस साझेदारी के अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जहां उनका फोकस इस कार्यक्रम को और अधिक लोगों तक पहुंचाने, पढ़ाई के तरीकों को मजबूत करने और डिजिटल लर्निंग को रोजगार के अवसरों से बेहतर तरीके से जोड़ने पर रहेगा।

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