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वो यादें और भावनाएँ, जो सोनी सब के कलाकारों के रक्षाबंधन को बनाती हैं खास
मुंबई, अगस्त 2026: रक्षाबंधन भाई-बहन के उस खूबसूरत रिश्ते का उत्सव है, जो प्यार, हंसी-मजाक, बचपन की यादों और हमेशा एक-दूसरे का साथ देने के वादे से जुड़ा होता है। समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बदल सकते हैं, लेकिन इस रिश्ते की भावनाएं हमेशा बनी रहती हैं। इस रक्षाबंधन पर सोनी सब के कलाकारों ने अपने भाई-बहनों से जुड़ी खास यादें, परंपराएं और उन तोहफों के बारे में बताया, जो उनके लिए महज चीजें नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ी यादें हैं।
‘यादें’ में डॉ. देव मेहता की भूमिका निभा रहे इकबाल खान ने कहा, “मेरी बहनें हमेशा मेरे लिए बेहद अहम रही हैं और रक्षाबंधन उनसे जुड़ी कई खूबसूरत यादें ताजा कर देता है। मेरे स्कूल के दिनों से जुड़ी एक खास परंपरा आज भी मेरे दिल के करीब है। मेरी थिएटर टीचर श्रीमती अरुणा आहलूवालिया की बेटी किस्मत आहलूवालिया, जो स्कूल में मेरी सीनियर थीं, कई सालों से मुझे राखी भेजती आ रही हैं। भले ही वह हांगकांग में रहती हैं, लेकिन हर साल बिना भूले वह राखी मेरे पास पहुंचती है और मैंने उन्हें संभालकर रखा है। उन्होंने जिस तरह इस खूबसूरत परंपरा को बनाए रखा है, उसकी भावना मेरे लिए बेहद खास है।”
तोरल रसपुत्रा: “राखी का मूल्य नहीं, उससे जुड़ी भावनाएं मायने रखती हैं”
‘हस्तिनापुर के वीर’ में कुंती का किरदार निभा रहीं तोरल रसपुत्रा ने कहा, “मेरे लिए रक्षाबंधन तोहफों से कहीं ज्यादा उससे जुड़ी भावनाओं का त्योहार है। बचपन में कलाई पर बंधा एक साधारण-सा धागा भी प्यार, देखभाल और हमेशा साथ रहने के वादे जैसा लगता था। मेरे भाई की ओर से दिया गया हर तोहफा मेरे लिए खास है। उन्होंने मुझे एक नेकलेस दिया था, जिसे मैं आज भी पहनती हूं। मेरे लिए वह सिर्फ एक गहना नहीं, बल्कि इस बात की याद है कि भाई-बहन का रिश्ता समय के साथ और मजबूत होता जाता है।”
समृद्ध बावा: “बहनें किसी न किसी तरह राखी मेरे तक पहुंचा ही देती हैं”
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में अश्विन का किरदार निभा रहे समृद्ध बावा ने अपनी दूर रहकर रक्षाबंधन मनाने की परंपरा साझा करते हुए कहा, “चूंकि मैं दूसरे शहर में रहता हूं, मेरी बहनें यह सुनिश्चित करती हैं कि मैं कभी रक्षाबंधन मिस न करूं। वे अपनी राखियां मुझे डाक से भेजती हैं। उस दिन मैं आमतौर पर किसी दोस्त से अपनी कलाई पर राखी बंधवा लेता हूं। मेरी बहनें यह भी सुनिश्चित करती हैं कि मैं उन्हें लंच या डिनर पर ट्रीट दूं। भले ही हम अलग-अलग शहरों में रहकर त्योहार मनाते हैं, लेकिन वे हमेशा कोई न कोई तरीका ढूंढ लेती हैं, जिससे यह दिन हमारे लिए खास बन जाए।”
नितिन बाबू: “कुछ रिश्ते हमेशा घर जैसे ही रहते हैं”
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में चिराग का किरदार निभा रहे नितिन बाबू ने कहा, “मेरे लिए राखी कभी सिर्फ एक धागा या तोहफा नहीं रही। इसमें सालों की यादें, प्यार और वह अनकहा वादा जुड़ा है कि हम हमेशा एक-दूसरे के साथ रहेंगे। मैं आज भी अपने भाई-बहनों की छोटी-छोटी राखियां और तोहफे संभालकर रखता हूं, खासकर बचपन की, क्योंकि वे मुझे उस सरल समय में वापस ले जाते हैं। मेरी बहन ने मुझे एक बहुत सुंदर जैकेट दी थी, जिसे मैं आज भी पहनता हूं। समय के साथ तोहफे पुराने हो सकते हैं, लेकिन उनके पीछे जुड़ी भावना और भी कीमती हो जाती है। यही रक्षाबंधन को खास बनाता है। यह याद दिलाता है कि जिंदगी कितनी भी बदल जाए या हम कितनी भी दूर क्यों न चले जाएं, कुछ रिश्ते हमेशा घर जैसे ही रहते हैं।”
मनीष वाधवा: “हर साल मैं ‘गोलगप्पे वाला भैया’ बन जाता हूं”
‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने कहा, “मेरे लिए रक्षाबंधन हमेशा किसी रस्म से ज्यादा रिश्ते का उत्सव रहा है। बचपन में मेरे भाई-बहन और मैं इसे बहुत उत्साह से मनाते थे और वे सरल-सी यादें आज भी मेरे दिल के बेहद करीब हैं। मेरी बहन ने एक बार मुझे हाथ से बनी राखी बांधी थी, जो आज भी मेरे पास सुरक्षित है।”
उन्होंने आगे कहा, “आज जिंदगी व्यस्त हो गई है और हम हमेशा साथ नहीं रह पाते, लेकिन वह स्नेह कभी नहीं बदलता। हर साल हमारी एक खास परंपरा होती है, जिसमें मैं ‘गोलगप्पे वाला भैया’ बनकर अपनी बहन और पूरे परिवार के लिए चाट बनाता हूं। मुझे लगता है कि यही भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरती है। उम्र बढ़ सकती है, लेकिन अपनापन और जुड़ाव कभी कम नहीं होता।”
मुस्कान बामने: “भाई-बहन आपको उस तरह जानते हैं, जैसे कोई और नहीं जान सकता”
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने ने कहा, “मुझे लगता है कि भाई-बहन होने की सबसे अच्छी बात यह है कि वे आपको उस तरह जानते हैं, जैसे कोई और नहीं जान सकता। आप एक पल में छोटी-सी बात पर झगड़ सकते हैं और अगले ही पल एक-दूसरे के लिए मौजूद होते हैं। रक्षाबंधन मुझे हमेशा उन्हीं छोटे-छोटे पलों की याद दिलाता है—छेड़छाड़, बहस और साथ बड़े होने की यादें।”
उन्होंने आगे कहा, “मेरा भाई मुझे बहुत शानदार स्टेशनरी देता है, क्योंकि मुझे पेंटिंग का शौक है। रंगीन पेन, मार्कर और हाईलाइटर जैसे तोहफे मुझे बहुत पसंद हैं। उम्र बढ़ने के बावजूद हमारा रिश्ता वैसा ही बना हुआ है और यही इस बंधन को इतना खास बनाता है।”
इन कलाकारों की यादें दिखाती हैं कि रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि बचपन की यादों, अपनापन, हंसी-मजाक और उम्रभर साथ निभाने वाले रिश्ते का उत्सव है।
‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ देखने के लिए सोनी सब से जुड़े रहें।
