19,061 से अधिक लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाव के प्रति किया गया जागरूक

मुंबई, अगस्त 2026: डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन पेमेंट ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर फ्रॉड का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। ऐसे में फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और भ्रामक मैसेज को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से एसवीसी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने साइबर सुरक्षा को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया।

बैंक ने 10 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में स्थित अपनी 203 शाखाओं के माध्यम से यह अभियान संचालित किया। इसके तहत बैंक कर्मचारियों ने आसपास की 213 हाउसिंग सोसाइटीज में पहुंचकर 19,061 से अधिक लोगों से संवाद किया और उन्हें साइबर ठगी से बचने के आसान और जरूरी उपायों की जानकारी दी।

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जागरूकता सत्रों के दौरान लोगों को फिशिंग, फर्जी इन्वेस्टमेंट स्कीम, ओटीपी और यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर कोड स्कैम, डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कस्टमर केयर कॉल जैसे साइबर अपराधों के बारे में बताया गया। साथ ही, बैंक की वास्तविक कम्युनिकेशन और आधिकारिक सेंडर आईडी की पहचान करने के तरीकों के बारे में भी जानकारी दी गई।

एसवीसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर रविंदर सिंह ने कहा, “साइबर फ्रॉड से बचने के लिए जागरूकता सबसे जरूरी सुरक्षा बन गई है। हमारा प्रयास है कि लोग फ्रॉड की कोशिशों को समय रहते पहचानें और उसका शिकार होने से बचें।”

बैंक के अनुसार, यह अभियान ऐसे समय में चलाया गया है जब 2026 के पहले छह महीनों में 12.7 लाख से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज की गईं और इनमें 10,178 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध फ्रॉड ट्रांजैक्शन शामिल रहे।

बैंक ने लोगों से अपील की कि वे अपना ओटीपी, बैंकिंग विवरण और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी अनजान या संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत बैंक को दें।

साइबर फ्रॉड की स्थिति में लोग 1930 पर कॉल कर सकते हैं या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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