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कई भाषाएँ, कई जॉनर, एक बड़ा विज़न: 2026-27 में ज़ी स्टूडियोज़ की दमदार कंटेंट स्लेट
मुंबई, अगस्त 2026: भारतीय सिनेमा का दायरा अब भाषा और क्षेत्र की सीमाओं से कहीं आगे बढ़ चुका है। दर्शकों की बदलती पसंद और देशभर में क्षेत्रीय कहानियों की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए ज़ी स्टूडियोज़ ने 2026-27 के लिए अपनी कंटेंट स्ट्रैटेजी को और व्यापक बनाया है। स्टूडियो की आगामी फिल्मों की स्लेट हिंदी, मराठी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, गुजराती, कन्नड़ सहित कई भारतीय भाषाओं में फैली है। इसमें कमर्शियल एंटरटेनमेंट, एक्शन, रोमांस, थ्रिलर, माइथोलॉजी, सस्पेंस और हाई-कॉन्सेप्ट कहानियों का विविध मिश्रण देखने को मिलेगा।
हिंदी सिनेमा में बड़े पैमाने की कहानियाँ
हिंदी फिल्म स्लेट में ‘बाप’, ‘रामभूमि’, ‘दिल्ली 2021’ और ‘ब्लाइंड बाबू’ जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। ये फिल्में बड़े पैमाने के मनोरंजन के साथ एक्शन, सस्पेंस और आधुनिक कहानी कहने के अलग-अलग अंदाज़ को सामने लाने का प्रयास करती हैं।
साउथ की भाषाओं में मजबूत मौजूदगी
ज़ी स्टूडियोज़ दक्षिण भारतीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है। तेलुगु में ‘इंद्रपुत्र’, ‘एनबीके111’, ‘कनका दुर्गा’ और ‘अनसूया जनरल स्टोर्स’ जैसे प्रोजेक्ट्स स्लेट का हिस्सा हैं।
कन्नड़ में ‘अन्ना फ्रॉम मेक्सिको’, जबकि तमिल में ‘हाई’ और ‘सत्यवान सावित्री’ जैसी फिल्में शामिल हैं। वहीं, बहुप्रतीक्षित ‘टॉम एंड चेरी’ के साथ स्टूडियो ने गुजराती सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज की है।
मराठी सिनेमा पर भी खास फोकस
मराठी सिनेमा ज़ी स्टूडियोज़ की कंटेंट रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। ‘आत्मपैम्फलेट’ को राष्ट्रीय पुरस्कारों में मिली सराहना के बाद स्टूडियो की आगामी मराठी स्लेट में ‘झेप’, ‘फुलवारा’, ‘मान’ और ‘जोगाई’ जैसी फिल्में शामिल हैं।
इन फिल्मों के जरिए स्थानीय कहानियों और प्रतिभाओं को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
अलग-अलग जॉनर की कहानियों का संगम
ज़ी स्टूडियोज़ की आगामी फिल्मों की खासियत सिर्फ उनकी भाषाई विविधता नहीं, बल्कि जॉनर की व्यापक रेंज भी है। ‘सिला’, ‘सत्यवान सावित्री’, ‘हाई’, ‘ब्लाइंड गेम’, ‘एनबीके111’, ‘जनवरी 12 विदुदला’, ‘एनकेआरएआर2’ और ‘दिल्ली 2021’ जैसी फिल्में अलग-अलग तरह की कहानियों और सिनेमाई अनुभवों को दर्शाती हैं।
स्टूडियो का लक्ष्य किसी एक भाषा, क्षेत्र या दर्शक वर्ग तक सीमित रहने के बजाय ऐसी फिल्मों का निर्माण और प्रस्तुति करना है, जिनमें अलग-अलग बाजारों के दर्शकों से जुड़ने की क्षमता हो।
‘भारत’ की विविधता को कहानियों में दिखाने का प्रयास
ज़ी स्टूडियोज़ के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारी पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजी इस विचार पर आधारित है कि भारत को सिर्फ एक भाषा, एक तरह की कहानी या एक सिनेमाई नजरिए से नहीं दिखाया जा सकता। हर मार्केट की अपनी ऑडियंस, टैलेंट और मनोरंजन की अलग पसंद है। हमारा उद्देश्य इसी विविधता को अपनी फिल्मों के जरिए सामने लाना है।”
उन्होंने आगे कहा, “हिंदी, मराठी, मलयालम और गुजराती से लेकर तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और दूसरी भाषाओं तक, हम अलग-अलग तरह की कहानियों के साथ एक मजबूत कंटेंट इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास ऐसी कहानियों को दर्शकों तक पहुंचाना है, जो भारत के साथ-साथ देश के बाहर रहने वाले दर्शकों से भी जुड़ सकें।”
एक्शन से थ्रिलर और माइथोलॉजी तक
जॉनर के स्तर पर भी स्लेट काफी विविध है। ‘बाप’ और ‘सिला’ बड़े पैमाने के कमर्शियल एक्शन एंटरटेनमेंट की ओर इशारा करते हैं। वहीं ‘ब्लाइंड गेम’, ‘ब्लाइंड बाबू’ और ‘दिल्ली 2021’ में साइकोलॉजिकल और थ्रिलर तत्व देखने को मिलेंगे।
दूसरी ओर ‘इंद्रपुत्र’ और ‘रामभूमि’ भारतीय माइथोलॉजी और इतिहास से प्रेरित बड़े सिनेमाई संसार को दर्शाने वाली फिल्में हैं।
‘टॉम एंड चेरी’, ‘हाई’, ‘सत्यवान सावित्री’, ‘अन्ना फ्रॉम मेक्सिको’, ‘झेप’, ‘फुलवारा’, ‘जोगाई’, ‘कनका दुर्गा’ और ‘अनसूया जनरल स्टोर्स’ जैसी फिल्में अलग-अलग भाषाओं और बाजारों में ज़ी स्टूडियोज़ की पहुंच को और विस्तार देती हैं।
नए दर्शकों और नए बाजारों पर नजर
2026-27 की यह कंटेंट रणनीति ज़ी स्टूडियोज़ की देशभर में नए दर्शकों और नए भाषा बाजारों तक पहुंच बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है। स्टूडियो जहां एक ओर स्टार-ड्रिवन और बड़े बजट की कमर्शियल फिल्मों पर ध्यान दे रहा है, वहीं हाई-कॉन्सेप्ट और स्थानीय जड़ों से जुड़ी कहानियों को भी अपनी स्लेट में बराबर जगह दे रहा है।
कई भाषाओं, अलग-अलग जॉनर और विविध बाजारों में फैली इस कंटेंट स्लेट के साथ ज़ी स्टूडियोज़ 2026-27 में भारतीय सिनेमा के बदलते दर्शक वर्ग के अनुरूप अपनी रणनीति को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। इसका फोकस ऐसी विविध, मनोरंजक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ी कहानियों पर है, जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को पर्दे पर उतारते हुए देशभर के दर्शकों से मजबूत कनेक्शन बना सकें।
