पर्दे के आइकॉन से लेकर निजी हीरो तक: सोनी सब के कलाकारों ने साझा की अपनी प्रेरणाओं की कहानियां

मुंबई, फरवरी 2026: हर कलाकार की यात्रा किसी न किसी प्रेरणा से शुरू होती है—एक ऐसा चेहरा, एक परफॉर्मेंस या एक पल, जो अभिनय को देखने का नजरिया हमेशा के लिए बदल देता है। कुछ के लिए ये प्रेरणाएं सिनेमा के सदाबहार आइकॉन होते हैं, तो कुछ के लिए वे सह-कलाकार या लेखक, जिनसे उन्होंने चुपचाप बहुत कुछ सीखा होता है। सोनी सब के लोकप्रिय कलाकार श्रेनु पारिख, सुम्बुल तौकीर खान, रजत वर्मा और दीक्षा जोशी ने उन दिग्गजों के बारे में खुलकर बात की, जिन्होंने उनके अभिनय, अनुशासन और कला को आकार दिया।

श्रेनु पारिख: गरिमा और शक्ति का संतुलन

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सोनी सब के शो ‘गणेश कार्तिकेय’ में देवी पार्वती की भूमिका निभा रहीं श्रेनु पारिख ने अपनी प्रेरणा के रूप में ऐश्वर्या राय बच्चन का नाम लिया।

उन्होंने कहा,

“ऐश्वर्या राय बच्चन हमेशा से मेरी प्रेरणा रही हैं। उनकी गरिमा और शांत आत्मविश्वास मुझे बेहद प्रभावित करता है। जिस सहजता और शक्ति के साथ वह खुद को प्रस्तुत करती हैं, वह मुझे भावनात्मक रूप से गहरी भूमिकाओं के लिए तैयार होने में मार्गदर्शन देता है। मैं हमेशा यही सीखने की कोशिश करती हूं कि शक्ति और कोमलता के बीच संतुलन कैसे रखा जाए।”

सुम्बुल तौकीर खान: हर सीन का सम्मान

‘इत्ती सी खुशी’ में अन्विता की भूमिका निभा रहीं सुम्बुल तौकीर खान ने अपने सह-कलाकार वरुण बडोला को अपनी प्रेरणा बताया।

सुम्बुल कहती हैं,

“वरुण बडोला सर के साथ काम करना मेरे लिए एक बड़ा सीखने का अनुभव रहा है। वह हर सीन, चाहे छोटा हो या बड़ा, पूरी ईमानदारी और तैयारी के साथ करते हैं। उन्हें देखकर मैंने सीखा है कि किसी भी पल को हल्के में नहीं लेना चाहिए और हर सीन का पूरा सम्मान करना चाहिए।”

रजत वर्मा: कम में ज्यादा कहने की कला

‘इत्ती सी खुशी’ में विराट का किरदार निभा रहे रजत वर्मा के लिए दिवंगत अभिनेता इरफान खान सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं।

रजत ने कहा,

“इरफान खान को देखकर कभी ऐसा नहीं लगा कि वे अभिनय कर रहे हैं—वह बस उस किरदार को जीते थे। उनकी सहजता ने मुझे सिखाया कि कभी-कभी कम करना ही ज्यादा असर छोड़ देता है। मैं हर किरदार में यही कोशिश करता हूं कि भावनाएं खुद बोलें और सब कुछ सच्चा लगे।”

दीक्षा जोशी: अभिनय और लेखन की ईमानदारी

‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में दीप्ति की भूमिका निभा रहीं दीक्षा जोशी ने अभिनय के साथ-साथ लेखन को भी अपनी प्रेरणा बताया।

उन्होंने कहा,

“तिलोत्तमा शोम और कोंकणा सेन शर्मा जैसी अभिनेत्रियां मुझे बहुत प्रेरित करती हैं, क्योंकि उनके अभिनय में गजब की सच्चाई होती है। साथ ही गुलज़ार साहब, मंटो और मन्नू भंडारी जैसे लेखकों की रचनाएं मुझे कहानी और भावनाओं को गहराई से समझना सिखाती हैं। मेरे लिए मजबूत लेखन और सशक्त अभिनय, दोनों ही कहानी कहने की आत्मा हैं।”

सोनी सब के ये कलाकार अपनी-अपनी प्रेरणाओं से सीख लेकर आज भी कैमरे के सामने हर किरदार में ईमानदारी और संवेदनशीलता लाने की कोशिश कर रहे हैं।

देखते रहिए ‘इत्ती सी खुशी’, ‘गणेश कार्तिकेय’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ — सिर्फ सोनी सब पर।

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