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आईएसबी रिपोर्ट: दीर्घकालिक विकास के लिए पारिवारिक व्यवसायों में इनोवेशन अनिवार्य
इंदौर। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन-चौथाई से अधिक योगदान देने वाले पारिवारिक व्यवसायों को भविष्य में अपनी विकास गति बनाए रखने के लिए इनोवेशन पर गंभीरता से निवेश करना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, 2047 तक भारत की आर्थिक वृद्धि में इन उद्यमों की भूमिका और अधिक बढ़ने की संभावना है, लेकिन फिलहाल कई मध्यम आकार के पारिवारिक व्यवसाय इस वृद्धि का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पारिवारिक व्यवसाय स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन इनमें से कई धीमी गति से बढ़ने वाले मॉडल पर निर्भर हैं और उच्च-विकास वाले क्षेत्रों के अवसरों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से मिड-साइज़ उद्यमों में देखी गई है, जिनके पास मजबूत संचालन क्षमता तो है, लेकिन नए बाजार बनाने, गैर-भौतिक परिसंपत्तियों में निवेश करने और भविष्य के राजस्व मॉडल विकसित करने की स्पष्ट रणनीति का अभाव है।
यह अध्ययन आईएसबी के सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन और थॉमस श्मिडहेनी सेंटर फॉर फैमिली एंटरप्राइज द्वारा तैयार किया गया है। इसमें ऑटोमोबाइल, रिटेल, फार्मा, हेल्थकेयर, आईटी और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में भारतीय पारिवारिक व्यवसायों के इनोवेशन और विकास पैटर्न का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में पाया गया कि पारंपरिक संचालन पद्धतियों की बजाय प्रोडक्ट इनोवेशन, सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और कस्टमर एंगेजमेंट में निवेश से दीर्घकालिक मूल्य निर्माण और स्थायी विकास संभव है।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि पारिवारिक उद्यमों के लिए सबसे बड़ा जोखिम बाजार की अस्थिरता नहीं, बल्कि रणनीतिक जड़ता है। डिजिटल परिवर्तन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और बदलते उपभोक्ता व्यवहार के दौर में यदि टेक्नोलॉजी—जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भी शामिल है—और रणनीतिक साझेदारियों में साहसी निवेश नहीं किया गया, तो वैश्विक विस्तार की संभावनाएं सीमित रह जाएंगी।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट में एराइज़ फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया है, जिसमें एंबिशन (महत्वाकांक्षा), रिस्क-टेकिंग, इनोवेशन, स्पीड एवं स्केल और इकोसिस्टम थिंकिंग को दीर्घकालिक मूल्य निर्माण का रोडमैप बताया गया है। यह फ्रेमवर्क साहसी लक्ष्य निर्धारण, त्वरित निर्णय-निर्माण, बिज़नेस मॉडल इनोवेशन और रणनीतिक साझेदारियों पर बल देता है।
आईएसबी के सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और मार्केटिंग स्ट्रेटेजी एंड इनोवेशन के नोवार्टिस प्रोफेसर राजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा,
“भारतीय पारिवारिक व्यवसाय एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां विरासत को बनाए रखते हुए फुर्ती और इनोवेशन अपनाना जरूरी हो गया है। केवल ईबीआईटीडीए पर केंद्रित रहने का समय बीत चुका है। अब टेक्नोलॉजी, डिजाइन थिंकिंग, प्लेटफॉर्म-आधारित बिज़नेस मॉडल और ब्रांड निर्माण में निवेश के जरिए भविष्य की वृद्धि सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।”
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आईएसबी पिछले एक दशक से पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट फॉर फैमिली बिज़नेस (PGP MFAB) के माध्यम से पारिवारिक उद्यमों के साथ काम कर रहा है। यह कार्यक्रम अगली पीढ़ी के नेताओं को आधुनिक प्रबंधन कौशल, वैश्विक दृष्टिकोण और व्यावहारिक सीख प्रदान कर पारिवारिक व्यवसायों को पेशेवर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायता करता है।
