किसानों के निशाने पर

किसानों के निशाने पर विश्व व्यापार संगठन भी है। उनकी मांग है कि सरकार भारत को विश्व व्यापार संगठन और मुक्त व्यापार समझौतों से बाहर निकाले। सोमवार को पंजाब व हरियाणा के किसानों ने राजमार्गों के किनारे कई स्थानों पर ट्रैक्टर खड़े करके प्रदर्शन किया। 

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर केंद्र पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। आंदोलन कर रहे किसानों ने डब्ल्यूटीओ की नीतियों की आलोचना की और उन्हें ‘किसान विरोधी’ बताया। उन्होंने दावा किया कि डब्ल्यूटीओ की नीतियों के कारण सरकार सभी फसलों पर एमएसपी नहीं दे रही है। 

उधर भारत ने डब्ल्यूटीओ के सदस्यों से लंबे समय से लंबित सार्वजनिक खाद्य भंडारण मुद्दे का स्थायी समाधान खोजने का आह्वान करते हुए कहा है कि यह सीधे तौर पर वर्ष 2030 तक ‘शून्य भुखमरी’ के सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने से संबंधित है। खाद्य सुरक्षा उद्देश्यों के लिए सार्वजनिक भंडारण कार्यक्रम एक नीति माध्यम है जिसके तहत सरकार एमएसपी पर किसानों से चावल और गेहूं जैसी फसलें खरीदती है तथा खाद्यान्न का भंडारण और गरीबों को वितरित करती है। 

दरअसल वर्ष 1994 से विश्व व्यापार समझौता कृषि क्षेत्र में लागू हुआ। समझौते का उद्देश्य कृषि क्षेत्र को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उत्पाद एवं व्यापार का निजीकरण करना था। डब्ल्यूटीओ का नियम कहता है कि विश्व व्यापार संगठन से जुड़े सदस्य देशों को अपने कृषि उत्पाद को दी जाने वाली घरेलू मदद की मात्रा को सीमित करना चाहिए। जबकि डब्ल्यूटीओ के नियम किसानों की मांग से विपरीत हैं। 

गौरतलब है विकसित राष्ट्रों ने अपने किसानों को भारी सहायता जारी रखी। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति किसान 300 डॉलर की सब्सिडी दी जाती है जबकि अमेरिका में यही सब्सिडी प्रति किसान 40,000 डॉलर की मिलती है। इससे विकसित देशों के किसानों की व्यक्तिगत उत्पादन लागत कम हुई और बाजारों में कम कीमत पर अपने उत्पादों को बेचकर भी वे मुनाफे में रहे वहीं हमारे किसान अपनी अत्यधिक कृषि लागत और कम बाजार भाव के कारण ऋणग्रस्त होते गए। 

किसानों के आंदोलन करने का  उद्देश्य ही यही है कि उन्हें एमएसपी, फसलों की खरीद और पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को लेकर कानूनी गारंटी दी जाए। सवाल है कि विश्व व्यापार समझौतों के तहत सरकारी खरीद तथा समर्थन मूल्य को कम कर दिए जाने से किसान बेबस और लाचार हो गए। क्या डब्ल्यूटीओ का कृषि समझौता खाद्य सुरक्षा नीति के विरुद्ध होने के साथ ही देश की नीति-निर्धारण की संप्रभुता में हस्तक्षेप भी है।

खबरें और भी हैं

Latest News

एसबीआई लाइफ का न्यू बिजनेस प्रीमियम 10% बढ़कर ₹20,259 करोड़ पहुंचा, मुनाफे में 17% की वृद्धि एसबीआई लाइफ का न्यू बिजनेस प्रीमियम 10% बढ़कर ₹20,259 करोड़ पहुंचा, मुनाफे में 17% की वृद्धि
मुंबई, नवंबर 2026। एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने 30 सितंबर 2026 को समाप्त अवधि के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया...
जयदीप अहलावत ने ‘पाताल लोक सीजन 2’ के लिए जीता आईफा डिजिटल अवॉर्ड, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के सम्मान से नवाजे गए
अदाणी यूनिवर्सिटी के तीसरे दीक्षांत समारोह में 374 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 10 मेधावियों को पदक से नवाजा गया
“मेरे किरदार की सबसे बड़ी कमजोरी वे लोग हैं, जिनसे वह प्यार करता है; उन्हें कभी मना नहीं कर पाता”: अधिक मेहता
“अपने विचार साझा करना और सवाल पूछना जरूरी है, क्योंकि इससे हम एक-दूसरे को बेहतर समझ पाते हैं”: मनीष वाधवा
Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.