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Monsoon Memories: कश्मीर की हल्की बारिश से मुंबई की झमाझम तक, सोनी सब के कलाकारों ने साझा कीं मानसून की खास यादें
मुंबई, अगस्त 2026: मानसून किसी के लिए गर्म चाय और पकौड़ों के साथ परिवार के बीच बिताए खूबसूरत पलों की याद लेकर आता है, तो किसी के लिए स्कूल की छुट्टियां, भीगी मिट्टी की खुशबू और हरी-भरी वादियां इसकी पहचान हैं। वहीं, मुंबई की तेज बारिश का अनुभव बिल्कुल अलग है। यहां बारिश कितनी भी जोरदार क्यों न हो, शहर की रफ्तार शायद ही थमती है।
इक़बाल खान को याद आई कश्मीर की 'शायराना' बारिश
‘यादें’ में डॉ. देव मेहता का किरदार निभा रहे इक़बाल खान ने बताया कि कश्मीर और मुंबई के मानसून में जमीन-आसमान का अंतर है।
उन्होंने कहा, “मैं कश्मीर में बड़ा हुआ हूं और वहां का मानसून मुंबई से बिल्कुल अलग है। घर पर बारिश हल्की और लगभग शायराना लगती है। पहाड़ और खूबसूरत हो जाते हैं और मौसम सुहाना हो जाता है। दूसरी ओर मुंबई की बारिश नाटकीय और अनिश्चित है, लेकिन इसके बावजूद शहर कभी रुकता नहीं।”
इक़बाल के मुताबिक, मुंबई का मानसून उन्हें मुश्किल और अव्यवस्थित परिस्थितियों को स्वीकार करना सिखाता है, जबकि कश्मीर की बारिश आज भी उनके लिए सुकून का अहसास है।
देविश आहूजा के लिए बारिश का मतलब था स्कूल की छुट्टी
‘यादें’ में डॉ. रौनक भाटिया की भूमिका निभा रहे देविश आहूजा ने सूरत में बिताए अपने बचपन को याद किया। उनके लिए भारी बारिश का सबसे बड़ा आकर्षण स्कूल की छुट्टी हुआ करती थी।
देविश ने बताया कि बारिश के दिनों में बालकनी में बैठकर चाय, गर्म पकौड़े और दादी के बनाए पराठे खाने का अपना अलग मजा था। लेकिन मुंबई आने के बाद मानसून को देखने का उनका नजरिया बदल गया।
उन्होंने कहा, “यहां चाहे जितनी बारिश हो, जिंदगी चलती रहती है। कॉलेज के दिनों में मैं वॉटरलॉगिंग के कारण फंस गया था, लेकिन सभी ने किसी न किसी तरह आगे बढ़ने का रास्ता निकाल लिया। यही मुंबई की खूबसूरती है कि बारिश हो या धूप, चलते रहो।”
मुस्कान बामने को याद आती है इटारसी की भीगी मिट्टी की खुशबू
‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ में शनाया का किरदार निभा रहीं मुस्कान बामने के लिए मानसून की यादें इटारसी से जुड़ी हैं। वहां बारिश का मतलब परिवार के साथ बाहर निकलना, भीगी मिट्टी की खुशबू महसूस करना और घर पर गर्म स्नैक्स के साथ शाम बिताना था।
मुस्कान ने कहा कि मुंबई आने के बाद उन्होंने बारिश की एक अलग ही रफ्तार देखी। यहां हर समय छाता साथ रखना और मौसम के अनुसार दिन की योजना बनाना जरूरी हो जाता है।
उन्होंने कहा, “कभी-कभी मुझे अपने होमटाउन की धीमी और आरामदायक बारिश याद आती है, लेकिन मुंबई को बारिश के बावजूद चलते देखना अपने आप में जादुई है।”
मनीष वाधवा को अंबाला की बारिश में याद आते हैं चाय-पकौड़े
‘हस्तिनापुर के वीर’ में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे मनीष वाधवा ने अंबाला में बिताए मानसून के दिनों को याद किया।
उन्होंने बताया कि पहली बारिश के साथ मौसम ठंडा हो जाता था और मिट्टी की खुशबू पूरे वातावरण में फैल जाती थी। परिवार के साथ गर्म चाय और पकौड़े खाने का यह बेहतरीन मौका होता था।
मनीष ने कहा, “मुंबई का मानसून बिल्कुल अलग है। यहां बारिश कहीं ज्यादा तेज होती है, लेकिन हर साल यह देखकर हैरानी होती है कि शहर उसी जज्बे के साथ चलता रहता है। मुंबई की बारिश में चाय और कांदा भजिया खाने का मजा ही अलग है।”
असम से राजस्थान तक अलग-अलग मानसून देख चुकी हैं ख्याति व्यास
‘यादें’ में डॉ. अनन्या का किरदार निभा रहीं ख्याति व्यास ने अपने पिता की सरकारी नौकरी के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का अनुभव किया है।
उन्होंने बताया कि असम में भारी बारिश और नमी का मौसम मुंबई जैसा महसूस होता था, जबकि गुजरात में बारिश अपेक्षाकृत हल्की होती थी। राजस्थान में बारिश बहुत कम देखने को मिलती थी।
ख्याति ने कहा, “हर जगह की अपनी खूबसूरती है। मैंने यही सीखा है कि आप जहां भी रहें, वहां के मौसम और उसकी खासियत की कद्र करें। मुझे मुंबई का मानसून पसंद है और जब मैं अपने होमटाउन जोधपुर जाती हूं, तो वहां की बारिश भी उतनी ही प्यारी लगती है।”
‘यादें’, ‘हस्तिनापुर के वीर’ और ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’ देखने के लिए जुड़े रहिए, सिर्फ सोनी सब पर।
