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FarmerChat ने पार किया 10 लाख यूजर्स का आंकड़ा, Digital Green ने लॉन्च किया नया AI आधारित FarmerChat 2.0
लखनऊ। डिजिटल ग्रीन इंडिया के एआई आधारित फार्मिंग एडवाइजरी असिस्टेंट ‘फार्मरचैट’ (FarmerChat) ने भारत में 10 लाख यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। अक्टूबर 2024 में लॉन्च हुए इस प्लेटफॉर्म की बढ़ती पहुंच के बीच संस्था ने अब इसका नया और उन्नत वर्जन FarmerChat 2.0 भी लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल, क्षेत्र और मौसम के अनुसार आसानी से भरोसेमंद कृषि सलाह उपलब्ध कराना है।
आवाज, फोटो और टेक्स्ट से पूछ सकते हैं सवाल
छोटे किसानों के सामने अक्सर सही समय पर खेती से जुड़ी सटीक जानकारी हासिल करने की चुनौती रहती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए डिजिटल ग्रीन ने फार्मरचैट विकसित किया है। किसान खेत या फसल में दिखाई देने वाली समस्या की तस्वीर भेजकर भी उससे संबंधित सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
फार्मरचैट फसल की योजना बनाने से लेकर कीट और बीमारी से बचाव, पशुपालन, मौसम और खेती में इस्तेमाल होने वाले संसाधनों तक विभिन्न विषयों पर जानकारी उपलब्ध कराता है। प्लेटफॉर्म फसल की स्थिति, स्थानीय मौसम और अन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय के अनुसार उपयोगी जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
इसके लिए फाइन-ट्यून लैंग्वेज मॉडल, रिट्रीवल-ऑगमेंटेड जनरेशन (RAG) और रिइन्फोर्समेंट लर्निंग फ्रॉम ह्यूमन फीडबैक (RLHF) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। किसानों को दी जाने वाली सलाह की स्थानीय कृषि विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों द्वारा नियमित समीक्षा भी की जाती है।
30 लाख से ज्यादा सवालों के दिए जवाब
डिजिटल ग्रीन के अनुसार, भारत में फार्मरचैट अब तक किसानों के 30 लाख से अधिक सवालों के जवाब दे चुका है और इसके लगभग 45 प्रतिशत यूजर्स महिलाएं हैं।
60 Decibels की एक स्वतंत्र स्टडी के मुताबिक, करीब 60 प्रतिशत सक्रिय यूजर्स ऐप से मिली सलाह को अपनाते हैं, जबकि 91 प्रतिशत किसानों ने कहा कि इससे खेती से जुड़े फैसले लेने में उनका भरोसा बढ़ा है। वहीं, IDinsight की एक अन्य स्वतंत्र स्टडी में 67 प्रतिशत सक्रिय यूजर्स द्वारा प्लेटफॉर्म से मिली सलाह अपनाए जाने की बात सामने आई।
प्रति किसान सालाना लागत करीब 33 रुपये
डिजिटल ग्रीन का दावा है कि एआई के इस्तेमाल से किसानों तक कृषि सलाह पहुंचाने की लागत में भी बड़ी कमी आई है। पारंपरिक माध्यमों से एक किसान को सालभर सलाह उपलब्ध कराने में करीब 3,300 रुपये खर्च होने की तुलना में फार्मरचैट के जरिए यह लागत लगभग 33 रुपये प्रति किसान सालाना रह गई है।
डिजिटल ग्रीन पिछले करीब 15 वर्षों से किसानों द्वारा बनाए गए वीडियो और ग्रामीण बैठकों के माध्यम से कृषि संबंधी जानकारी पहुंचाने का काम कर रहा है। फार्मरचैट इसी मॉडल को एआई के जरिए व्यक्तिगत और ऑन-डिमांड सलाह में बदलने का प्रयास है।
FarmerChat 2.0 में क्या है नया?
किसानों से मिले फीडबैक के आधार पर FarmerChat 2.0 में इंटरफेस को पहले से आसान बनाया गया है। इसमें नए एडवाइजरी कार्ड जोड़े गए हैं। किसान की फसल, स्थान, मौसम और पहले पूछे गए सवालों के आधार पर प्रोफाइल तैयार होती रहती है, जिससे उसकी जरूरत के मुताबिक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।
नए वर्जन में किसान के सवाल पूछने का इंतजार करने के बजाय उसकी फसल, क्षेत्र और मौसम के आधार पर प्रासंगिक सवाल और सुझाव भी सामने आ सकेंगे। किसानों में आवाज और फोटो के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए इन सुविधाओं को भी अधिक महत्व दिया गया है।
2028 तक 35 लाख और किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
डिजिटल ग्रीन इंडिया ने वर्ष 2028 तक फार्मरचैट से 35 लाख अतिरिक्त किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। संस्था महिला किसानों की भागीदारी बढ़ाने, जलवायु-अनुकूल खेती को प्रोत्साहित करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में भी काम करने की योजना बना रही है।
डिजिटल ग्रीन इंडिया की सीईओ निधि भसीन ने कहा कि FarmerChat 2.0 में किए गए बदलाव किसानों से मिले फीडबैक पर आधारित हैं। किसानों को अपनी फसल, मौसम और भाषा के अनुसार उसी तरीके से सलाह चाहिए, जिस तरह वे रोजमर्रा में संवाद करते हैं।
उन्होंने बताया कि संस्था का अगला कदम ‘एग्रीकल्चरल एआई हार्नेस’ विकसित करना है, जहां खेती की सलाह के साथ मौसम, बाजार और सरकारी योजनाओं जैसी विभिन्न भरोसेमंद सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की योजना है।
