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उत्तराखंड में 4,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में उद्यमिता आधारित शिक्षा की शुरुआत
देहरादून। उत्तराखंड ने सरकारी स्कूलों में उद्यमिता और जीवन कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), उत्तराखंड ने 4,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में ‘कौशल बोध’ कार्यक्रम लागू करने के लिए उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है।
कार्यक्रम के तहत कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए ‘कौशल बोध’ नामक गतिविधि-आधारित पाठ्यक्रम शुरू किया गया है, जबकि कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए ‘कौशलम’ कार्यक्रम पहले से 2,200 से अधिक स्कूलों में संचालित किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझने, उद्यम विकसित करने और उन्हें संचालित करने का अनुभव दिया जाता है।
एनसीईआरटी के पीएसएससीआईवीई और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई 2023) के सहयोग से विकसित ‘कौशल बोध’ कार्यक्रम में लाइफ फॉर्म, मशीन एवं मटेरियल्स और ह्यूमन सर्विसेज से जुड़े नौ मॉड्यूल शामिल हैं। इसमें छात्र टीम के रूप में काम करते हुए सरल उद्यम तैयार करते हैं और अपने विचारों को उत्पादों व सेवाओं में बदलने की प्रक्रिया सीखते हैं।
एससीईआरटी और उद्यम लर्निंग फाउंडेशन इस साझेदारी के तहत शिक्षकों के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेंगे, ताकि कक्षा में प्रयोगात्मक और प्रोजेक्ट आधारित सीखने का माहौल तैयार किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि बड़े स्तर पर लागू ‘कौशलम’ कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम पहले से सामने आ रहे हैं। कक्षा 11 के छात्रों ने 1,500 से अधिक व्यावसायिक विचारों पर काम किया, जिनमें से 350 से अधिक को जिला स्तर की प्रदर्शनियों में और 47 को राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों में प्रस्तुत किया गया। इनमें से 10 से अधिक छात्र अपने उद्यमों को आगे बढ़ा रहे हैं और आय भी अर्जित कर रहे हैं।
उद्यम लर्निंग फाउंडेशन के सीईओ एवं सह-संस्थापक मेकिन माहेश्वरी ने कहा कि कक्षा 6 से 12 के दौरान छात्रों में सोचने और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इस तरह की सीख छात्रों को वास्तविक दुनिया के लिए तैयार करती है और उनमें आत्मविश्वास व पहल करने की भावना पैदा करती है।
एससीईआरटी उत्तराखंड में कौशल बोध कार्यक्रम के समन्वयक सुनील भट्ट ने कहा कि यह पहल मिडल स्कूल स्तर पर ही व्यावसायिक और कौशल आधारित शिक्षा को शामिल करती है, जिससे छात्रों को व्यवहारिक ज्ञान और प्रोजेक्ट आधारित सीखने का अवसर मिलता है।
एससीईआरटी की निदेशक (एकेडमिक, रिसर्च एंड ट्रेनिंग) बंदना गरब्याल ने कहा कि कौशल बोध कार्यक्रम एनईपी 2020 के विजन को सशक्त बनाता है और सरकारी स्कूलों में शिक्षा को अधिक व्यवहारिक, प्रासंगिक और भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
