अमृता ने एआई आधारित क्लिनिकल असिस्टेंट ‘मेडसम’ लॉन्च किया

दिल्ली-एनसीआर। डॉक्टरों और मरीजों के बीच संवाद को बेहतर बनाने और मेडिकल प्रलेखन में लगने वाले समय को कम करने के उद्देश्य से अमृता ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित क्लिनिकल असिस्टेंट ‘मेडसम’ लॉन्च किया है। यह सिस्टम डॉक्टर और मरीज के बीच होने वाली बातचीत को सुनकर उसे स्वचालित रूप से संरचित मेडिकल नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन और मरीजों के लिए आसान भाषा में चिकित्सा जानकारी में बदल देता है।

मेडसम को अमृता विश्व विद्यापीठम, फरीदाबाद के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अमृता टेक्नोलॉजीज और अमृता हॉस्पिटल्स के सहयोग से विकसित किया है। यह एआई सिस्टम कई भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है और मरीजों को उनकी अपनी भाषा और आवाज़ में चिकित्सा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराता है।

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अमृता की ओर से कहा गया कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में डॉक्टरों का एक बड़ा हिस्सा समय टाइपिंग और कागजी कार्रवाई में व्यतीत हो जाता है, जिससे मरीजों को पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। मेडसम इसी समस्या के समाधान के रूप में विकसित किया गया है।

मेडसम चिकित्सक-मरीज परामर्श के दौरान बैकग्राउंड में कार्य करता है और परामर्श समाप्त होते-होते क्लिनिकल नोट्स, प्रिस्क्रिप्शन और अस्पताल से जुड़े दस्तावेज तैयार कर देता है। इससे डॉक्टर बिना किसी तकनीकी व्यवधान के मरीज पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

यह सिस्टम मरीजों को उनकी स्थानीय भाषा में सरल शब्दों में चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराता है। जानकारी को वॉयस रिकॉर्डिंग के रूप में साझा किया जाता है, जिससे मरीज अपनी बीमारी, दवाओं और इलाज से संबंधित विवरण को बार-बार सुनकर समझ सकते हैं। हिंदी, तमिल, बंगाली सहित कई भारतीय भाषाओं को इसमें शामिल किया गया है।

अमृता के अनुसार, मेडसम फिलहाल प्रयोगात्मक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग अमृता हॉस्पिटल्स के कई विभागों में किया जा रहा है। इनमें गायनेकोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, न्यूरोसर्जरी और पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग शामिल हैं। यह प्रणाली डॉक्टर डैशबोर्ड, पेशेंट ऐप और एडमिनिस्ट्रेटिव कंसोल के माध्यम से संचालित होती है।

अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. सचिन गुप्ता ने कहा कि एक व्यस्त ओपीडी में डॉक्टर का लगभग एक-तिहाई समय पेपरवर्क में चला जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली से डॉक्टरों को मरीजों के साथ अधिक समय बिताने में मदद मिल रही है।

वहीं अमृता विश्व विद्यापीठम के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डीन प्रोफेसर कमल बिजलानी ने कहा कि यह समाधान भारत की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि मेडसम भारत-जेन नामक भारतीय बड़े लैंग्वेज मॉडल पर आधारित है और इसे वास्तविक क्लिनिकल वातावरण में परखा गया है।

मेडसम को हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में एक प्रमुख हेल्थकेयर एप्लिकेशन के रूप में प्रदर्शित किया गया था। यह प्रणाली परम-17बी भारत-जेन मॉडल पर आधारित है और इसे भारत के स्वदेशी एआई सिस्टम से संचालित पहले क्लिनिकल एआई टूल्स में शामिल माना जा रहा है।

कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद, डीएसटी सचिव प्रोफेसर अभय करंदीकर, एमईआईटीवाय सचिव एस. कृष्णन और इंफोसिस के सह-संस्थापक डॉ. क्रिस गोपालकृष्णन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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