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Varanasi News: काशी में मांस-मछली की दुकानों को शहर से बाहर शिफ्ट करने के फैसले पर सियासत तेज, कारोबारियों ने जताई चिंता
वाराणसी। धार्मिक नगरी काशी में नगर निगम द्वारा मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्तावित निर्णय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। सावन माह से पहले लिए गए इस फैसले पर जहां कुछ लोगों ने स्वागत किया है, वहीं व्यापारियों और विपक्षी दलों ने कई सवाल खड़े किए हैं।
नगर निगम के जनसंपर्क अधिकारी संदीप श्रीवास्तव के अनुसार, शहर में संचालित लगभग 350 से 400 मांस, मछली और चिकन की दुकानों को सावन शुरू होने से पहले शहर के बाहरी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने की योजना है। इसके लिए रामनगर, सुजाबाद, गणेशपुर, अवलेशपुर और शिवपुर क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है।
नगर निगम का कहना है कि सावन के दौरान अधिकांश मांस दुकानों का कारोबार प्रभावित होता है, इसलिए व्यवस्थित स्थानांतरण से बेहतर व्यवस्था बनाई जा सकेगी। हालांकि व्यापारियों का कहना है कि अचानक लिए गए इस फैसले से उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा।
महानगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्षद दल के नेता का नाम जोड़कर भ्रम फैलाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर कथित प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया गया तो कांग्रेस कानूनी कार्रवाई करेगी।
दूसरी ओर, कुछ स्थानीय लोगों ने फैसले का समर्थन किया है। वाराणसी निवासी अजय शर्मा ने कहा कि काशी भगवान शिव की नगरी है और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इससे जुड़ी है। ऐसे में धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय उचित माना जा सकता है। उन्होंने शहर से शराब की दुकानों को भी बाहर स्थानांतरित करने की मांग की।
हालांकि कई नागरिकों ने इस निर्णय के व्यावहारिक पहलुओं पर चिंता व्यक्त की है। बंगाली टोला निवासी सुब्रत मुखर्जी ने कहा कि मछली और मांस अनेक परिवारों के नियमित भोजन का हिस्सा हैं और इन्हें खरीदने के लिए शहर से बाहर जाना कठिन होगा। वहीं मंडुआडीह निवासी अनीश सिंह का कहना है कि इस फैसले से सभी समुदायों के उपभोक्ताओं को असुविधा होगी और उनकी लागत भी बढ़ सकती है।
युवा कांग्रेस नेता विकास सिंह ने कहा कि काशी की सांस्कृतिक पहचान और स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है, लेकिन व्यापारियों की आजीविका भी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने वैकल्पिक व्यवस्थाओं को स्पष्ट करने की मांग की।
मांस व्यापारी साहिल ने आशंका जताई कि दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित किए जाने से ग्राहकों की संख्या कम हो सकती है, जिससे कारोबार प्रभावित होगा। उनका कहना है कि कई नियमित ग्राहक दूर स्थित दुकानों तक नहीं पहुंच पाएंगे।
फिलहाल नगर निगम ने स्थानांतरण की अंतिम समयसीमा और नई जगहों पर दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को लेकर कोई विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए हैं। ऐसे में व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
