तृष्णा की डायन से सावधान रहें ऋषि चिंतन

"तृष्णा" यानी लालच – मानव जीवन की सबसे खतरनाक गिरफ़्त।

यह हमें सीमित आवश्यकताओं से भटका कर असंख्य सुख-सुविधाओं और धन-दौलत की दौड़ में धकेल देती है। मन में यह भ्रम पैदा होता है कि जितना ज्यादा धन-संपत्ति होगी, उतना अधिक सुख मिलेगा। लेकिन यह सोच सिर्फ एक छलावा है।

वास्तविकता यह है कि इंसान की मूल जरूरतें बहुत थोड़ी हैं।

पेट भरने, तन ढकने और परिवार के पालन-पोषण के लिए जो जरूरी है, वह कुछ घंटों की मेहनत से ही मिल सकता है। इसके बाद का समय आत्म-सुधार, ज्ञान-विकास और ईश्वर सेवा में लगाया जा सकता है। लेकिन कठिनाई तब आती है जब इंसान को "धन्ना सेठ" बनने की सनक लग जाती है।

यह भी पढ़े - दिल्ली अग्निकांड के बाद बलिया में बड़ी कार्रवाई, अवैध महावीर लॉज सील; होटल संचालकों में हड़कंप

लालच: चैन का दुश्मन

जिस व्यक्ति को धन की हवस लग जाती है, उसकी दुनिया का भगवान पैसा बन जाता है। वह हर हाल में धन जोड़ना और उससे भोग-विलास करना चाहता है। धीरे-धीरे वह चापलूसों, ठगों, ईर्ष्यालुओं और दुश्मनों से घिर जाता है। धन का रख-रखाव, चोरी-डकैती, बदनामी और व्यसन—इन सबसे उसका जीवन अशांत हो उठता है।

शराब, जुआ, ताश, नाच-गाना, नशा और अन्य विकृतियाँ—सब इस बेइंतहा धन की देन बनकर सामने आती हैं। सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि कमाई गई संपत्ति कहीं बर्बाद न हो जाए, खासकर तब जब योग्य उत्तराधिकारी भी न हो।

बेईमानी की फिसलन

जब तृष्णा की गहराई बढ़ती है और ईमानदारी की सीमा पार हो जाती है, तो इंसान भ्रष्टाचार और बेईमानी की राह पर उतर आता है। लालच के अंधकार में उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है, और वह अनीति के दलदल में धँसता चला जाता है। लेकिन यह खाई इतनी गहरी है कि रावण, हिरण्यकश्यप, वृत्रासुर और सिकंदर जैसे महाशक्तिशाली भी इसे भर नहीं पाए—तो फिर एक साधारण इंसान की क्या बिसात?

तृष्णा का यह कुचक्र कभी भी पूर्ण संतोष नहीं देता, बल्कि जीवन को अशांत, अस्थिर और अधूरा ही बनाए रखता है।

मोह की दूसरी जंजीर

तृष्णा के बाद मोह दूसरी बड़ी जकड़ है। अक्सर लोग अपने प्रियजनों के लिए ढेर सारा धन-संपत्ति जोड़कर छोड़ देना चाहते हैं, लेकिन यह मोह भी अंततः विनाशकारी सिद्ध होता है। "मुफ्त की विरासत" विरासत पाने वालों को आलसी, निकम्मा और संघर्षहीन बना देती है। संपत्ति के लिए पारिवारिक झगड़े, मुकदमे और टूटते रिश्ते इसी मोह की देन हैं।

सच्चा उत्तराधिकार – आत्मनिर्भरता और संस्कार

संपत्ति से बेहतर यह है कि हम अपने परिवार को मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का जीवन जीने की प्रेरणा दें। ऐसे संस्कार दें, जो जीवन भर उनके साथ रहें और उन्हें हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का संबल दें।

खबरें और भी हैं

Latest News

Ballia News: दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का वांछित आरोपी गिरफ्तार, रेवती पुलिस ने न्यायालय भेजा Ballia News: दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का वांछित आरोपी गिरफ्तार, रेवती पुलिस ने न्यायालय भेजा
बलिया : रेवती थाना पुलिस ने दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार कर...
Chandauli News: ग्रेट निकोबार बचाओ अभियान की शुरुआत, कांग्रेस ने चलाया हस्ताक्षर अभियान
फिटनेस के साथ स्वाद का संतुलन: सोनी सब के कलाकारों ने बताए अपने पसंदीदा चीट मील्स
'पुष्पा इम्पॉसिबल' ने पूरे किए 4 सफल वर्ष, प्रेरणादायक कहानियों से जीता दर्शकों का दिल
Ballia News: प्राथमिक विद्यालय परिसर में बार बालाओं के डांस का वीडियो वायरल, जांच के बाद कार्रवाई की तैयारी
Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.