Happy Mother's Day : दिल को छू देगी नेहा की यह शब्द श्रृंखला

मां
क्या लिखूं उनके विषय में, जो पांवों तले जन्नत लेकर घूमती है।
पलटे पन्ने वेद पुराणों के, वहां भी दुनिया इनकी मुट्ठी में सिमटी है।
कितनी अद्भुत रचना है सृष्टि की, सृष्टि रचयिता की नजरें भी इनके चरणों में झुकती है।
कितनी पावन हृदयप्रिय वह मुस्कान, कभी-कभी तो इस चेहरे में ईश्वर की छवि झलकती हैl
क्या लिखूं उनके विषय में, जो पांवों तले जन्नत लेकर घूमती है।


क्षमता की कोई थाह नहीं मां है वो, बुरी नजरों को लाल मिर्च में समेट के चूल्हे में झोकती है।
कैसे बखानूं उसकी ताकत का आलम, वो तो काला टीका लगाकर बलाओं का रुख मोड़ती है।
उसकी सादगी में भी ख़ूबसूरती की कोई काट नहीं, सुना है मां की चरण धूलि को अप्सराएँ तो सिर माथे ओढती हैं।
क्या लिखूं उनके विषय में, जो पाँवों तले जन्नत लेकर घूमती है।

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नेहा यादव
पुत्री श्रीमती उषा मनोज यादव
करम्मर, बलिया।

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