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बुंदेलखंड की बदहाली बदलने के लिए जरूरी है ठोस कार्ययोजना
वीरता, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास की पहचान रहा बुंदेलखंड आज गरीबी, बेरोजगारी और पलायन की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। कभी अपनी समृद्ध परंपराओं के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र अब विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ता जा रहा है। गाँवों में भुखमरी, जल संकट और बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक है, लेकिन सरकारों की योजनाएं अभी तक जमीनी स्तर पर अपेक्षित बदलाव नहीं ला सकी हैं।
सबसे पहले सरकार को क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद परिवारों का पारदर्शी और सटीक डेटाबेस तैयार करना चाहिए। जब तक अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की वास्तविक जरूरतों की पहचान नहीं होगी, तब तक सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा। आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं को एकीकृत कर ऐसा तंत्र विकसित करना जरूरी है, जिससे कोई भी पात्र परिवार वंचित न रहे।
रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देना भी बुंदेलखंड के विकास की सबसे बड़ी जरूरत है। क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें प्रशिक्षण और अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। सरकार को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कौशल विकास केंद्र स्थापित करने चाहिए, जहां प्रशिक्षण के साथ रोजगार की गारंटी भी सुनिश्चित हो। डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन जैसे व्यवसायों को सहकारी मॉडल पर बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।
इसके साथ ही किसानों और कारीगरों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए मजबूत सहकारी समितियों का निर्माण आवश्यक है। बुंदेलखंड के विशेष उत्पादों को ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़कर उत्पादकों को सीधा लाभ दिलाया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर की फूड प्रोसेसिंग इकाइयों की स्थापना भी रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी विशेष सुधार की आवश्यकता है। कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करना होगा और मातृ-शिशु पोषण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। वहीं गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए छात्रवृत्ति तथा सुपर-30 जैसे कोचिंग सेंटर स्थापित किए जाने चाहिए, ताकि आर्थिक अभाव किसी की प्रतिभा के रास्ते में बाधा न बने।
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लाड़ली बहना जैसी योजनाओं का दायरा बढ़ाना भी जरूरी है। यदि महिलाओं को पर्याप्त आर्थिक सहयोग और रोजगार के अवसर मिलें, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव है।
कुल मिलाकर बुंदेलखंड का विकास किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक समन्वित और मिशन मोड में चलने वाली कार्ययोजना की मांग करता है। इसकी नियमित समीक्षा मुख्यमंत्री स्तर पर होनी चाहिए, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।
अब समय आ गया है कि सरकार बुंदेलखंड के विकास को प्राथमिकता दे और इस क्षेत्र को गरीबी और पलायन से मुक्त करने के लिए ठोस राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाए। यदि सही दिशा में गंभीर प्रयास किए जाएं, तो बुंदेलखंड एक बार फिर विकास और स्वाभिमान की नई पहचान बन सकता है।
