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Budget 2026-27 : प्वाइंट्स में समझें केंद्रीय बजट की अहम घोषणाएं
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर रविवार को संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-2027 की मुख्य बातें इस प्रकार हैं, कर्तव्य भवन में तैयार पहला बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों पर केन्द्रित....
- पहला कर्तव्य - उत्पादकता, प्रतिस्पर्धाक्षमता बढ़ा कर उच्च आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखना।
- दूसरा कर्तव्य - जन आकांक्षाओं को पूरा करना और लोगों की क्षमता बढाना।
- तीसरा कर्तव्य - सबका साथ सबका विकास के लिए सभी परिवारों, समुदायों और क्षेत्रों तक संसाधनों, सुविधाओं को पहुंचाना और अवसरों का विस्तार करना।
- वर्ष 2026-27 में 53.5 लाख करोड़ रुपए के व्यय का प्रावधान, गैर ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपए।
- केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपए, सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपए, तिथि अंकित प्रतिभूतियों से शुद्ध उधार 11.7 लाख करोड रुपए रहने का अनुमान है।
- चालू वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों में कुल व्यय 49.6 लाख करोड रुपए, गैर ऋण प्राप्तियां 34 लाख करोड रुपए है, केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियाँ 26.7 लाख करोड रुपए।
- बजट अनुमान 2026-27 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा 4.4 प्रतिशत।
जीडीपी संशोधित अनुमान 2025-26 के 56.1 प्रतिशत की तुलना में 2026-27 में 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान।
16वें वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार वित्त आयोग अनुदान के रूप में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।
पहले कर्तव्य के तहत आर्थिक वृद्धि तेज करने के लिए छह हस्तक्षेपों का प्रस्ताव।
सात रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विनिर्माण को प्रोत्साहन देने, बायोफार्मा शक्ति (ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए स्वास्थ्य देखभाल को बेहतर करने की रणनीति) के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की पंचवर्षीय योजना।
तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों (एन.आई.पी.ई.आर.) की स्थापना, सात मौजूदा संस्थानों का उन्नयन किया जाएगा।
एक हजार से अधिक मान्यता प्राप्त इंडिया क्लिनिकल ट्रायल्स स्थलों का नेटवर्क बनाया जाएगा।
सेमीकंडक्टर उद्योग के उपकरण और सामग्री बनाने, फुलस्टेक इंडिया आई.पी. डिजाइन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू करने की घोषणा।
इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जे विनिर्माण योजना का बजट चालीस हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव।
दुर्लभ खनिजों के खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में तीन विशेष औद्योगिक गलियों के विकास के लिए सहायता देने का प्रस्ताव।
तीन समर्पित कैमिकल पार्क स्थापित करने की योजना लाने का प्रस्ताव।
पूंजीगत सामानों की विनिर्माण क्षमता मजबूत की जाएगी, केंद्रीय लोक उपक्रमों के जरिए हाईटेक टूल रूम की स्थापना।
विनिर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले उन्नत उपकरणों का देश में ही विनिर्माण प्रोत्साहित करने के लिए निर्माण संवर्धन और अवसंरचना उपकरण योजना (सी.आई.ई.) शुरू की जाएगी।
दस हजार करोड़ रुपये के बजट से पांच वर्ष की कंटेनर विनिर्माण योजना लाने का प्रस्ताव।
वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत कार्यक्रम घोषित, प्राकृतिक फाइबर, मानवनिर्मित फाइबर और नए जमाने के फाइबर में आत्मनिर्भरता के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना।
आधुनिक पारंपरिक क्लस्टरों के लिए वस्त्र विस्तार और रोजगार योजना। चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव।
खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प की मजबूती के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल का प्रस्ताव।
200 परम्परागत औद्योगिक क्लस्टरों के पुनरुद्धार की योजना लाने का प्रस्ताव।
लघु और मझौले उद्यमों के प्रोत्साहन के लिए दस हजार करोड़ रुपये का एस.एम.ई. ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्ताव।
आत्मनिर्भर भारत फंड के लिए 2000 करोड़ रुपये आवंटित।
अवसंरचना को ठोस प्रोत्साहन वित्त वर्ष 2026-27 में सार्वजनिक पूंजी व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा।
ऋणदाताओं को आंशिक ऋण गारंटी उपलब्ध कराने के लिए अवसंरचना जोखिम गारंटी फंड स्थापित करने का प्रस्ताव।
केंद्रीय सरकारी उपक्रमों की भू-सम्पत्तियों के इस्तेमाल के लिए विशेष रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्टों (रेइट) बनाने का प्रस्ताव।
डानकूनी (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) के बीच नए समर्पित माल गलियारे (डीएफसी) के विकास की घोषणा।
तालचेर और अंगुल जैसे खनिज समृद्ध और कलिंग नगर जैसे औद्योगिक केंद्रों को जोडने के लिए ओडिशा में राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या -5 के साथ काम शुरू करते हुए 20 नए राष्ट्रीय जलमार्ग चालू किए जाएंगे।
जलमार्ग क्षेत्र के लिए अपेक्षित श्रम शक्ति के विकास के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण उत्कृष्टता संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
अंतर्देशीय जलमार्गों और तटीय पोत परिहवन की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढाकर वर्ष 2047 तक 12 प्रतिशत करने के लिए तटीय कार्गो प्रोत्साहन योजना।
सी-प्लेन के स्वदेशी निर्माण के प्रोत्साहन के लिए सी-प्लेन वी.जी.एफ. स्कीम शुरू की जाएगी।
दीर्घावधि ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चत करना - कार्बन कैप्चर , उपयोग और भंडारण (सी.सी.यू.एस.) प्रौद्योगिकियों के लिए पांच वर्ष में 20 हजार करोड़ रुपये आवंटित किये जाएंगे।
शहरों के आर्थिक क्षेत्रों का विकास - नगरों के आर्थिक क्षेत्र (सी.ई.आर.) के विकास के लिए पांच वर्षों में पांच हजार करोड़ रुपये दिये जायेंगे।
मुम्बई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बैंगलुरू, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बैंगलुरू, दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी-सिलिगुडी़ के बीच सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
बैंकिंग और वित्त:
बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के उद्देश्य से ''विकसित भारत के लिए बैंकिंग'' पर उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव। पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम के पुनर्गठन का प्रस्ताव।
विदेशी निवेश प्रोत्साहन के लिए विदेश मुद्रा प्रबंधन (गैर-ऋण लिखत) नियमावली की व्यापक समीक्षा का प्रस्ताव।
बड़े शहरों को बड़ी राशि के म्यूनिसिपल बॉण्ड जारी करने हेतु प्रोत्साहित करने , एक बार में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के बॉण्ड निर्गम पर सौ करोड़ रुपये का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव।
दूसरा कर्तव्य- लोगों की आकांक्षाएं पूरी करना और क्षमता बढ़ाना: सेवा क्षेत्र पर विशेष ध्यान के साथ 'शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम' पर उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव।
पांच वर्ष में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशवरों (ए.एच.पी.) जोड़े जाएंगे। ए.एच.पी. के लिए मौजूदा संस्थानों के उन्नयन , निजी तथा सरकारी क्षेत्रों में नए ए.एच.पी. संस्थानों की स्थापना की घोषणाद।
वृद्धों की चिकित्सा और संबद्ध देखभाल में मदद के लिए कुछ वर्षों में डेढ़ लाख देखभाल सेवा सुश्रुषा करने वालों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं, जामनगर में डब्ल्यू.एच.ओ. वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केन्द्र के उन्नयन का प्रस्ताव।
पशुपालन:
निजी क्षेत्र में पशु रोग विशेषज्ञ और पैरा पशु शल्य महाविद्यालय, पशु अस्पताल, नैदानिक प्रयोगशालाओं और प्रजनन सुविधाओं के लिए ऋण संबद्ध पूंजी सब्सिडी सहायता योजना शुरू करने का प्रस्ताव। सरकार 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की व्यवस्था करेगी। मनोरंजन गेमिंग वाली ऑरेंज इकॉनामी (सृजन-सामग्री): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी, मुम्बई को 15 हजार माध्यमिक विद्यालयों और पांच सौ महाविद्यालयों में ए.वी.जी.सी. (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) कंटेंट क्रिएटर लैब (सी.सी.एल.) स्थापित करने में सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव।
शिक्षा:
बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरीडोर के आसपास प्रतिस्पर्धी तरीके से राज्यों को पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप के विकास के लिए सहायता । प्रत्येक जिले में विज्ञान , गणित और इंजीनियरिंग की छात्रओं के लिए महिला छात्रावास की स्थापना ।
पर्यटन:
राष्ट्रीय आतिथ्यसेवा संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव। 12 सप्ताह के मानकीकृत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के जरिए 20 पर्यटन स्थलों के लिए 10 हजार गाइडों के कौशल उन्नयन की प्रायोगिक योजना। - सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत महत्व वाले सभी स्थानों के डिजिटल दस्तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना की जाएगी।
विरासत और संस्कृति पर्यटन:
लोथल, धौलावीरा, राखीगढ़ी, अदिचनाल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस जैसे 15 पुरातात्विक स्थलों को जीवंत और अनुभवजन्य सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव।
खेल: अगले दशक में खेल-कूद के क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव।
तीसरा कर्तव्य- सबका साथ- सबका विकास :
किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन, पांच सौ जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, पशुपालन, उच्च मूल्य वाली कृषि को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
तटवर्ती इलाकों में नारियल, चंदन, कोको, काजू जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों को सहायता देने, नारियल संवर्धन योजना , पूर्वोत्तर में अगर और पर्वतीय क्षेत्रो में बादाम, अखरोट और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव। -वर्ष 2030 तक भारतीय काजू और कोको को प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में बदलने के लिए समर्पित कार्यक्रम का प्रस्ताव।
मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर के लिए प्रतिबद्धता उत्तर भारत में मानसिक स्वास्थ्य के लिए निमहंस-टू की स्थापना की जाएगी। -रांची और तेजपुर में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का क्षेत्रीय शीर्ष संस्थानों के रूप में उन्नयन किया जाएगा।
पूर्वोदय राज्यों और उत्तर-पूर्व क्षेत्र पर ध्यान, दुर्गापुर में बेहतर संपर्क व्यवस्था के साथ एकीकृत पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे के विकास, 5 पूर्वोत्तर राज्यों में 5 पर्यटन स्थलों के निर्माण और 4000 ई-बसों के प्रावधान का प्रस्ताव। - अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए नई योजना।
