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पश्चिम बंगाल में छह महीनों में सात दोषियों को मिली मौत की सजा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की विभिन्न अदालतों ने पिछले छह महीनों में छह दोषियों को नाबालिग लड़कियों के बलात्कार और हत्या के अपराध में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा, अपने ही परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले एक व्यक्ति को भी फांसी की सजा दी गई, जिससे मृत्युदंड पाने वालों की कुल संख्या सात हो गई। इन सात मामलों में से छह को ‘दुर्लभ’ मामलों की श्रेणी में रखा गया था।
मामलों की कानूनी प्रक्रिया
इसके अलावा, कक्षा आठ की 14 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध बलात्कार और हत्या का मामला भी शामिल है। इस किशोरी का क्षत-विक्षत शव 7 फरवरी 2025 को कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में बरामद हुआ था। इस मामले में पुलिस ने 22 वर्षीय ई-रिक्शा चालक को गिरफ्तार किया है।
पश्चिम बंगाल में अंतिम न्यायिक फांसी
राज्य में आखिरी न्यायिक फांसी दो दशक पहले हुई थी। दक्षिण कोलकाता के सुरक्षा गार्ड धनंजय चटर्जी को 1990 में 16 वर्षीय छात्रा से बलात्कार और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था और 15 अगस्त 2004 को अलीपुर जेल में फांसी दी गई थी।
हालिया मौत की सजाएं
सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच कई अदालतों ने जघन्य अपराधों में शामिल दोषियों को मौत की सजा सुनाई।
सिलीगुड़ी की एक POCSO अदालत ने 7 सितंबर 2023 को मोहम्मद अब्बास को मृत्युदंड सुनाया।
उसे अगस्त 2023 में माटीगारा इलाके में स्कूल जा रही 16 वर्षीय लड़की से बलात्कार और हत्या का दोषी पाया गया था।
सरकार और सत्तारूढ़ दल की प्रतिक्रिया
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन फैसलों का स्वागत किया। पार्टी ने अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर लिखा:
"यह त्वरित सजा पश्चिम बंगाल पुलिस के प्रयासों का प्रमाण है, जिसने एक साल के भीतर न्याय सुनिश्चित किया। ‘अपराजिता बलात्कार विरोधी विधेयक’ के लागू होने से कठोर सजाएं मिसाल बनेंगी, अपराधियों में डर पैदा करेंगी और ऐसे जघन्य अपराधों को रोकने में मदद करेंगी।"
इन फैसलों से न्यायपालिका की त्वरित कार्रवाई और अपराधियों को सख्त सजा देने की प्रतिबद्धता जाहिर होती है।
