त्योहार की रौनक के पीछे छिपी मेहनत को सामने लाएगी पैरागॉन की नई ब्रांड फिल्म

कोलकाता, सितंबर 2026: त्योहारों की चमक-दमक के पीछे कई ऐसे लोगों की मेहनत छिपी होती है, जिनका योगदान अक्सर नजरों से ओझल रह जाता है। इसी अनदेखी मेहनत को सामने लाने के उद्देश्य से भारत के प्रमुख फुटवियर ब्रांड्स में शामिल पैरागॉन फुटवियर इस दुर्गा पूजा पर अपनी नई ब्रांड फिल्म लेकर आ रहा है।

फिल्म की कहानी उन लोगों के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिनकी मेहनत और लगन से त्योहारों का माहौल जीवंत होता है। कहानी पूजा की तैयारियों के बीच एक ऐसे व्यक्ति पर केंद्रित है, जो अपने मोहल्ले के लिए बांस का पंडाल तैयार करता है।

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पंडाल बनाने वाले शख्स की कहानी

फिल्म में पंडाल तैयार करने वाले व्यक्ति और उसकी छोटी बेटी के बीच के खूबसूरत रिश्ते को भी दिखाया गया है। उनके रोजमर्रा के छोटे-छोटे पलों के जरिए दर्शकों को उस व्यक्ति की जिंदगी और उसके काम से जुड़ी भावनात्मक दुनिया देखने को मिलती है।

उसे अपने काम पर गर्व है, भले ही पंडाल तैयार होने के बाद वहां आने वाले ज्यादातर लोगों की नजर शायद उस मेहनत तक कभी न पहुंचे। फिल्म इसी अनदेखे योगदान को बेहद सहज तरीके से सामने लाने की कोशिश करती है।

त्योहार से ज्यादा त्योहार की तैयारियों पर फोकस

इस कैंपेन की परिकल्पना टर्मरिक ने की है। फिल्म में दुर्गा पूजा की चमक-दमक दिखाने के बजाय उसके पीछे चलने वाली तैयारियों, इंतजार और मेहनत पर ध्यान दिया गया है।

कहानी एक खाली मोहल्ले के मैदान के धीरे-धीरे भव्य पंडाल में बदलने के सफर के साथ आगे बढ़ती है। इसके समानांतर पंडाल तैयार करने वाले व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी भी दिखाई जाती है। पंडाल के आकार लेने के साथ उसकी मेहनत और योगदान की अहमियत भी बिना किसी दिखावे के दर्शकों के सामने आती है।

'हर कदम पर चुपचाप साथ देने की भावना'

कैंपेन को लेकर पैरागॉन फुटवियर के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग एंड आईटी सचिन जोसेफ ने कहा कि दुर्गा पूजा साथ होने, परंपरा और समुदाय की भावना से गहराई से जुड़ा त्योहार है।

उन्होंने कहा कि पैरागॉन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में एक भरोसेमंद साथी बने रहने और हर कदम पर चुपचाप उनका साथ देने में विश्वास करता है। फिल्म के जरिए इसी भावना को त्योहार की कहानी से जोड़ने की कोशिश की गई है, ताकि उन छोटी-बड़ी कोशिशों को सामने लाया जा सके, जिनसे मिलकर त्योहार की खुशियां आकार लेती हैं।

पिता-बेटी का रिश्ता कहानी में जोड़ेगा भावनात्मक रंग

टर्मरिक के फाउंडर और सीईओ राहुल गुहा ने बताया कि कहानी का विचार दुर्गा पूजा की चमक-दमक से आगे जाकर उन लोगों की मेहनत को देखने से आया, जिनकी वजह से पूरा उत्सव संभव होता है।

उनके मुताबिक, बांस का पंडाल बनाने वाला व्यक्ति कहानी का केंद्र है और फिल्म को जानबूझकर सहज व सादगी भरे अंदाज में रखा गया है। पिता और बेटी का रिश्ता कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है, लेकिन इसका मूल विचार केंद्र में ही रहता है।

पश्चिम बंगाल की संस्कृति और पूजा की तैयारी की झलक

फिल्म पश्चिम बंगाल की संस्कृति और दुर्गा पूजा से जुड़े माहौल को करीब से दिखाती है। यहां पंडाल का तैयार होना भी पूजा के इंतजार और उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

फिल्म में तैयार पंडाल की भव्यता के बजाय उन दिनों को दिखाया गया है, जब वह धीरे-धीरे आकार ले रहा होता है। पंडाल का बदलता रूप, आसपास से गुजरते परिचित चेहरे, पूजा की तैयारियों की बढ़ती हलचल और अपने काम से संतुष्ट उस व्यक्ति का चेहरा—बिना ज्यादा कुछ कहे उसकी मेहनत की कहानी बयां करते हैं।

डिजिटल और सोशल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगा कैंपेन

पैरागॉन की यह ब्रांड फिल्म दुर्गा पूजा के दौरान डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज की जाएगी। कैंपेन का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल और उन दर्शकों पर रहेगा, जो दुर्गा पूजा की संस्कृति, भावनाओं और उससे जुड़े इंतजार को करीब से महसूस करते हैं।

यह फिल्म इस संदेश के साथ सामने आती है कि त्योहार सिर्फ रोशनी, सजावट और उत्सव का नाम नहीं है, बल्कि उसके पीछे उन अनगिनत लोगों की मेहनत भी होती है, जो बिना किसी उम्मीद के अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं और दूसरों के लिए त्योहार को खास बनाते हैं।

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