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नई दिल्ली : ग्रामीण बदलाव पर सांसदों-विधायकों के लिए एनएफपीआरसी की वर्कशॉप, डेटा आधारित विकास पर जोर
नई दिल्ली : Nation First Policy Research and Change Foundation (एनएफपीआरसी) ने सांसदों और विधायकों के लिए ग्रामीण विकास को गति देने के उद्देश्य से एक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया। “विकसित भारत@2047 के लिए ग्रामीण भारत को बदलना: कन्वर्जेंस, गवर्नेंस और ग्रामीण समृद्धि” विषय पर आयोजित यह कार्यक्रम इंडिया हैबिटेट सेंटर में संपन्न हुआ।
एनएफपीआरसी के चेयरपर्सन तरुण चुघ ने अपने संबोधन में कहा कि योजनाओं का फोकस केवल प्रक्रिया नहीं, बल्कि ठोस परिणामों पर होना चाहिए। उन्होंने संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल और जमीनी स्तर पर सेवाओं को मजबूत करने में डेटा के उपयोग को अहम बताया।
केंद्रीय मंत्री भागवत कराड के नेतृत्व में हुए सत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और डिजिटल टूल्स जैसे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर व जियोटैगिंग के उपयोग पर जोर दिया गया। इस दौरान वेतन भुगतान में देरी, कमजोर बुनियादी ढांचा और ग्राम पंचायत स्तर पर बेहतर योजना की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने डिजिटल कम्युनिकेशन स्ट्रेटेजी पर सत्र लिया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से सरकारी कार्यों को प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाने पर फोकस किया गया।
पूर्व आईएएस अधिकारी बी. के. अग्रवाल ने ग्रामीण भूमि प्रबंधन में सुधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटाइजेशन और पारदर्शिता से संपत्ति अधिकार मजबूत होंगे और योजनाओं का बेहतर लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एनएफपीआरसी की रिसर्च की सराहना करते हुए कहा कि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) के लिए 49 ब्राउनफील्ड साइट्स की पहचान एक महत्वपूर्ण पहल है, जो ऊर्जा क्षेत्र में तेजी लाएगी।
कार्यक्रम में “Powering the Next Billion” नामक रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें 11.2 गीगावाट कोयला क्षमता को SMR तकनीक में बदलने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के समापन पर एनएफपीआरसी बोर्ड सदस्य मनसा मोहन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी वर्कशॉप, नीति संवाद और विधायी सहयोग के माध्यम से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देती रहेगी।
इस वर्कशॉप का मुख्य उद्देश्य नीतियों के बेहतर समन्वय, डेटा आधारित शासन और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना था, ताकि ग्रामीण भारत में स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
