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“राधे के साहस, आत्मसम्मान और माता-पिता के प्रति प्रेम ने मुझे प्रभावित किया”: वेंकटेश पांडे
सोनी सब के ‘हस्तिनापुर के वीर’ में राधे की भूमिका निभा रहे वेंकटेश पांडे ने साझा किया किरदार से जुड़ा अपना अनुभव
मुंबई, अक्टूबर 2026। सोनी सब का पौराणिक धारावाहिक ‘हस्तिनापुर के वीर’ पांडवों और कौरवों के जीवन के शुरुआती दौर को पर्दे पर प्रस्तुत कर रहा है। शो में उनके बचपन, आपसी रिश्तों और उन अनुभवों को दिखाया जा रहा है, जिन्होंने आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा तय की। इसी कहानी में वेंकटेश पांडे द्वारा निभाए जा रहे राधे के किरदार की एंट्री ने एक नया मोड़ जोड़ा है। राधे का जीवन पांडवों और कौरवों, दोनों से गहराई से जुड़ा हुआ है।
राधे के किरदार ने वेंकटेश को क्यों आकर्षित किया?
राधे की भूमिका निभाने के अनुभव के बारे में वेंकटेश पांडे कहते हैं, “राधे का किरदार निभाना मेरे लिए बेहद संतोषजनक अनुभव रहा है। मैं उनके साहस, आत्मसम्मान और अपने माता-पिता के प्रति उनके गहरे प्रेम से प्रभावित हुआ। इस भूमिका की ओर मुझे सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली बात उनकी जीवन यात्रा की भावनात्मक गहराई और उनके व्यक्तित्व की कई परतें हैं।”
निष्ठा ही राधे की ताकत और चुनौती
राधे को उनकी निष्ठा और वचनों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। हालांकि, कई बार यही गुण उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी डाल देते हैं। इस पहलू पर वेंकटेश कहते हैं, “मेरे लिए यह दोनों ही बातें हैं। उनकी निष्ठा उन गुणों में से एक है, जो उन्हें प्रशंसनीय बनाती है, लेकिन यही उन्हें कई बेहद कठिन परिस्थितियों में भी डाल देती है। यही बात उन्हें मानवीय और दर्शकों से जुड़ा हुआ बनाती है। वे अपने वचनों और प्रतिबद्धताओं पर डटे रहते हैं, तब भी जब उनके सामने मौजूद विकल्प बेहद कठिन होते हैं।”
किरदार से मिली आत्मविश्वास और दृढ़ता की सीख
राधे की यात्रा ने वेंकटेश को निजी जीवन के लिए भी कुछ महत्वपूर्ण सीख दी हैं। अभिनेता बताते हैं, “राधे का किरदार निभाने ने मुझे यह एहसास कराया है कि परिस्थितियां कैसी भी हों, खुद पर विश्वास बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। उनके जीवन ने मुझे सिखाया है कि हमारे संघर्ष हमारी कीमत तय नहीं करते। साथ ही, उदारता, निष्ठा और दृढ़ता ऐसे मूल्य हैं, जिन्हें हमें हमेशा अपने जीवन में संजोकर रखना चाहिए।”
महाभारत की मूल भावना को बनाए रखने की कोशिश
महाभारत के पात्रों को निभाने के साथ दर्शकों की अपेक्षाएं भी जुड़ी होती हैं। ऐसे में राधे को प्रामाणिक रूप से पर्दे पर उतारने के बारे में वेंकटेश कहते हैं, “मैंने राधे को केवल एक योद्धा के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उनकी भावनाओं और रिश्तों को समझने की कोशिश की है। मैं उनके माता-पिता के प्रति प्रेम, उनकी उदारता और उनके जीवन में आने वाले संघर्षों पर ध्यान देता हूं। साथ ही, मैं महाभारत की मूल भावना को हमेशा ध्यान में रखता हूं और इस पात्र तथा पूरी कहानी के साथ वही सम्मान बरतने का प्रयास करता हूं, जिसके वे हकदार हैं।”
परिवार से जुड़े दृश्यों ने किया भावुक
राधे के किरदार को समझने में कुछ दृश्यों ने वेंकटेश की विशेष मदद की। अपने अनुभव को साझा करते हुए वह कहते हैं, “उन दृश्यों ने मुझे सबसे अधिक भावुक किया है, जिनमें उसके परिवार को उसके कवच-कुंडल के रहस्य की रक्षा करते हुए दिखाया गया है। सोनी सब का ‘हस्तिनापुर के वीर’ पांडवों और कौरवों के बचपन को दर्शाता है और राधे के बचपन के संघर्ष बेहद वास्तविक महसूस होते हैं। उन पलों ने मुझे उसकी ताकत के पीछे छिपी संवेदनशीलता और भावनात्मक कमजोरी को समझने में मदद की।”
कवच-कुंडल धारण करना रहा यादगार अनुभव
पौराणिक धारावाहिकों में भव्य परिधान, हथियार, एक्शन और कलाकारों की बॉडी लैंग्वेज अहम भूमिका निभाते हैं। शो की शूटिंग के अपने यादगार अनुभव के बारे में वेंकटेश बताते हैं, “राधे का परिधान पहनना, खासकर कवच और कुंडल धारण करना और उनकी दुनिया में कदम रखना अपने आप में एक अविस्मरणीय अनुभव है। भव्य परिधान, हथियार और उनकी विशिष्ट बॉडी लैंग्वेज मुझे इस किरदार से और गहराई से जुड़ने में मदद करते हैं। घंटों लंबी शूटिंग ने भी मुझे अनुशासन, धैर्य और समर्पण के बारे में बहुत कुछ सिखाया है।”
देखना न भूलें ‘हस्तिनापुर के वीर’, सोमवार से शनिवार रात 9 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।
