‘यादें’ के नए ट्रैक में सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देंगे डॉ. देव, इक़बाल खान बोले- “मानवता के रास्ते में कोई भी सामाजिक नियम आड़े नहीं आना चाहिए”

मुंबई, अक्टूबर 2026: सोनी सब का शो ‘यादें’ किल्लारी गाँव में डॉ. देव (इक़बाल खान) की कहानी के जरिए मनोरंजन के साथ महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों को भी सामने ला रहा है। आगामी ट्रैक में डॉ. देव के सामने ऐसी परिस्थिति आती है, जहाँ एक गर्भवती महिला को तत्काल चिकित्सकीय मदद की जरूरत होती है, लेकिन सामाजिक मान्यताएँ उनके रास्ते में बाधा बन जाती हैं।

मिश्री नाम की गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर डॉ. देव उसका इलाज करना चाहते हैं। डॉक्टर होने के नाते वह पूरी तरह योग्य हैं, लेकिन गाँव वाले सिर्फ इसलिए उनका विरोध करते हैं क्योंकि डॉ. देव पुरुष हैं और मिश्री महिला। ऐसे में डॉ. देव के सामने मरीज की जान बचाने और ग्रामीणों की रूढ़िवादी सोच के बीच एक बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है।

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मिश्री को तकलीफ में देखकर डॉ. देव ग्रामीणों को मनाने के लिए एक योजना बनाते हैं। हालांकि, उनकी योजना उस समय मुश्किल में पड़ जाती है, जब वह ग्रामीणों के सामने सच्चाई स्वीकार कर लेते हैं कि उन्होंने यह सब सिर्फ मिश्री का इलाज करने के लिए किया था। इससे नाराज़ ग्रामीण उन पर पत्थर बरसाते हैं।

हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, डॉ. देव अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि मरीज की जान बचाना किसी भी सामाजिक या लैंगिक पाबंदी से ऊपर है।

आगामी ट्रैक को लेकर इक़बाल खान ने कहा, “मेरा मानना है कि हर विश्वास और परंपरा को समय के साथ विकसित होना चाहिए। यदि कोई चीज हमें किसी दूसरे इंसान की मदद करने से रोकती है या समाज के रूप में हमें पीछे ले जाती है, तो हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्या उसका उद्देश्य आज भी प्रासंगिक है।”

उन्होंने आगे कहा, “डॉ. देव की इस परिस्थिति के माध्यम से हम यह दिखाना चाहते हैं कि मानवता के रास्ते में कोई भी सामाजिक मान्यता नहीं आनी चाहिए। शिक्षा केवल किताबों और डिग्रियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें यह समझ भी शामिल होनी चाहिए कि जरूरत के समय किसी के साथ खड़ा होना सबसे बड़ा मानवीय मूल्य है। एक डॉक्टर के रूप में डॉ. देव की प्राथमिकता मिश्री की मदद करना है और मेरा मानना है कि यह ऐसा मूल्य है, जिसे हम सभी को अपनाना चाहिए, चाहे हमारा लिंग कुछ भी हो या समाज हमसे कैसी भी अपेक्षाएँ रखता हो।”

अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या डॉ. देव ग्रामीणों की सोच बदलने में कामयाब हो पाते हैं और उन्हें यह समझा पाते हैं कि किसी की जान बचाना किसी भी लैंगिक पाबंदी से अधिक महत्वपूर्ण है।

देखिए ‘यादें’, हर सोमवार से शनिवार रात 8 बजे, सिर्फ सोनी सब पर।

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