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'हस्तिनापुर के वीर' माता-पिता को संस्कारों और चरित्र निर्माण का महत्व याद दिलाएगा : मनीष वाधवा
मुंबई, जून 2026। सोनी सब का पौराणिक धारावाहिक 'हस्तिनापुर के वीर' पांडवों और कौरवों के बचपन की अनकही कहानियों को दर्शकों के सामने ला रहा है। यह शो उन रिश्तों, मूल्यों और संस्कारों को सामने लाता है, जिन्होंने आगे चलकर हस्तिनापुर के भविष्य को आकार दिया। शो में भीष्म पितामह की भूमिका निभा रहे अभिनेता मनीष वाधवा का मानना है कि यह धारावाहिक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि परिवार और समाज के लिए महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।
उन्होंने कहा, "हर अभिनेता को जीवन में ऐसा प्रतिष्ठित किरदार निभाने का अवसर नहीं मिलता। भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग, अनुशासन, कर्तव्य और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। ऐसे चरित्र को पर्दे पर जीवंत करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।"
भीष्म पितामह के मूल्यों से गहरा जुड़ाव
मनीष वाधवा का कहना है कि वे व्यक्तिगत रूप से भीष्म पितामह के अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सिद्धांतों के प्रति समर्पण से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा, "एक कलाकार के रूप में अनुशासन हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। भीष्म पितामह हमें सिखाते हैं कि जिम्मेदारी और मूल्यों के प्रति समर्पण ही व्यक्ति को महान बनाता है।"
शो में दिखेगा भीष्म पितामह का संवेदनशील रूप
अभिनेता के अनुसार, 'हस्तिनापुर के वीर' में दर्शकों को भीष्म पितामह का एक नया और भावनात्मक पक्ष देखने को मिलेगा। इसमें वे केवल हस्तिनापुर के संरक्षक ही नहीं, बल्कि पांडवों और कौरवों के मार्गदर्शक, संरक्षक और दादा-तुल्य व्यक्तित्व के रूप में नजर आएंगे।
उन्होंने कहा कि शो में यह दिखाया गया है कि भीष्म पितामह सभी बच्चों के प्रति समान स्नेह रखते हैं और उन्हें निष्पक्षता के साथ जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य सिखाते हैं।
युवा कलाकारों के साथ खास रिश्ता
मनीष वाधवा ने युवा कलाकारों के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेट पर बच्चों के साथ उनका रिश्ता बेहद आत्मीय है।
उन्होंने कहा, "ऑफ-स्क्रीन भी कई बच्चे मुझे प्यार से 'पितामह' या 'दादू' कहकर बुलाते हैं। उनके साथ समय बिताना, बातचीत करना और हंसी-मजाक करना मुझे बहुत अच्छा लगता है।"
उन्होंने बताया कि युवा कलाकारों को वे हमेशा यही सलाह देते हैं कि अभिनय के साथ-साथ अपने बचपन का आनंद लेना भी जरूरी है।
माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण संदेश
मनीष वाधवा का मानना है कि यह धारावाहिक आज के माता-पिता को यह याद दिलाएगा कि बच्चों को दिया जाने वाला सबसे बड़ा उपहार धन-संपत्ति नहीं, बल्कि मजबूत संस्कार और अटल चरित्र है।
उन्होंने कहा, "बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं। उन्हें सही दिशा देना और अच्छे संस्कार देना माता-पिता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। 'हस्तिनापुर के वीर' यही संदेश देता है कि जैसा बोओगे, वैसा ही काटोगे।"
उन्होंने आगे कहा कि यह धारावाहिक किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर प्रदान करता है और दर्शकों को अपने बच्चों के पालन-पोषण के तरीकों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।
'हस्तिनापुर के वीर' का प्रसारण सोनी सब पर हर सोमवार से शनिवार रात 9 बजे किया जा रहा है।
