श्रमिकों की सुरक्षा

गाजा में चल रहे युद्ध के बीच इजराइल का निर्माण क्षेत्र चरमरा गया है। इजराइल में प्रशिक्षित मजदूरों की कमी का सामना कर रहे निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के मकसद से भारत के 60 से ज्यादा कामगारों का पहला जत्था इजराइल पहुंच गया है। आने वाले दिनों में और भारतीयों को इजराइल रवाना किया जाएगा।

लगभग नौ मिलियन लोगों का देश इजराइल कृषि, निर्माण और देखभाल जैसे क्षेत्रों में विदेशी श्रम पर बहुत अधिक निर्भर करता है। इजराइल-हमास युद्ध के बीच यह आवश्यकता और भी जरूरी हो गई है जिसमें 7 अक्टूबर से गाजा में लगभग 27,000 लोग और इजराइल में लगभग 1200 लोग मारे गए हैं।

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श्रमिकों की कमी ने इजराइल के निर्माण उद्योग को विशेष रूप से बड़ा झटका दिया है। फलस्तीनी केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार युद्ध से पहले इजराइल में काम करने वाले 150,000 से अधिक फलस्तीनियों में से दो-तिहाई निर्माण कार्य में थे। निर्माण श्रमिकों की कमी इतनी गंभीर है कि अधिकारियों का कहना है कि इजराइल के लगभग आधे निर्माण स्थल अब बंद हो गए हैं। इसके बाद वहां कामगार संकट के मद्देनजर इजराइल व भारत की सरकारों (जी 2 जी) के बीच हुए समझौते के तहत श्रमिक इजराइल गए हैं। अभी 10 हजार कामगारों को भी जल्द ही भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। 

इस बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला किया और कहा कि युद्ध प्रभावित इजराइल में नौकरियों के लिए भर्ती अभियान दर्शाता है कि देश बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और गरीबी के दौर से गुजर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन को वर्ष 2024 में बेरोजगारी में वैश्विक वृद्धि का पूर्वानुमान है। वास्तव में दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश भारत अपने लोगों के लिए नौकरियां प्रदान करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

युद्ध लंबा चलने की स्थिति में भारतीय मजदूरों को इजराइल भेजने का प्रस्ताव इस तथ्य को स्थापित करेगा कि मौजूदा सरकार में रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में गंभीरता की कमी है। उधर ट्रेड यूनियन उत्प्रवास अधिनियम के उल्लंघन का हवाला देते हुए श्रम संगठन इस रोजगार अभियान को चुनौती दे रहे हैं।

भारत से गए श्रमिकों को 1.37 लाख रुपये (6,100 इजरायली शेकेल) का मासिक वेतन देने का वादा किया गया है। आवश्यकता है कि इजराइल में भू-राजनीतिक चुनौतियों पर विचार करते हुए मजबूत सुरक्षा प्रोटोकॉल और आकस्मिक योजनाएं स्थापित करके भेजे गए श्रमिकों की सुरक्षा एवं उनके हित को प्राथमिकता दें। आजीविका के लिए जान जोखिम में डालने वाले श्रमिकों की सुरक्षा हमारे लिए प्रमुख चिंता का विषय है।

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