चीन पर दबाव

अमेरिका रूस की मदद रोकने के लिए लगातार चीन पर दबाव बना रहा है। इसके चलते दोनों देशों के बीच रिश्ते फिर से बिगड़ गए हैं। अमेरिका के विदेशमंत्री एंटनी ब्लिंकन ने शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और अन्य वरिष्ठ चीनी अधिकारियों से मुलाकात की।

दोनों नेताओं की यह मुलाकात अमेरिका और चीन के बीच विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विवादों को दूर करने की कोशिश के तहत हुई है। ब्लिंकन ने कहा कि उन्होंने चिनफिंग से चीन द्वारा रूस को की जा रही आपूर्ति को लेकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया। चीन मशीन और माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक की आपूर्ति कर रहा है जिसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस रक्षा पंक्ति को मजबूत करने में कर रहा है।

चिनफिंग से मुलाकात के बाद ब्लिंकन ने संवाददाताओं से कहा अगर चीन मदद न करे तो रूस यूक्रेन में लड़ाई जारी रखने में मुश्किल का सामना करेगा। गौरतलब है कि हाल ही में चीन और रूस ने आर्थिक और व्यापार सहयोग को बढ़ाने का फैसला लिया है।

इस पर अमेरिका ने एतराज जताते हुए कहा रूस के रक्षा उद्योग को आपूर्ति करना न केवल यूक्रेन की सुरक्षा को खतरा पैदा करता है बल्कि यूरोप की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है। परंतु अमेरिका के एतराज को चीन ने सिरे से खारिज कर दिया। अमेरिका ने कहा था कि अगर रूस को यूक्रेन में बढ़त मिलती है तो वह चीन को जिम्मेदार ठहराएगा। 

इस पर चीन ने कहा कि वह रूस के साथ अपने संबंधों पर आलोचना या दबाव स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में चीन के राष्ट्रपति व अमेरिका के विदेशमंत्री की मुलाकात खास अहमियत रखती है। दोनों देशों के बीच मतभेदों के बढ़ने के बावजूद हाल के महीनों में बातचीत के दौर में वृद्धि हुई है। फिर भी दोनों देशों के नेताओं की टिप्पणी मतभेदों की एक लंबी सूची का संकेत देती है जिसमें ताइवान और दक्षिण चीन सागर, व्यापार और मानवाधिकार, रूस के लिए चीन का समर्थन और ‘सिंथेटिक ओपिओइड प्रीकर्सर’ का उत्पादन और निर्यात शामिल है।

उधर चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि चीन की मांग सुसंगत है और वह हमेशा एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करने की वकालत करता है। अमेरिका को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, चीन के विकास को दबाना नहीं चाहिए, और जब चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की बात आती है तो चीन की लाल रेखाओं पर कदम नहीं उठाना चाहिए। यानि दोनों देशों के बीच मतभेद अधिक गंभीर होते जा रहे हैं और वैश्विक सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहे हैं। चीन और अमेरिका को द्वेषपूर्ण प्रतिस्पर्धा में शामिल होने के बजाय साझा आधार तलाशना चाहिए।

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