भारत-अमेरिका संबंध

अमेरिका कई क्षेत्रों में भारत के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है। भारत के साथ संबंधों को गहरा करना अमेरिकी विदेश नीति के सबसे महत्वपूर्ण तत्वों में से एक है। भारत और अमेरिका के व्यापक साझा हित हैं। अमेरिका उस क्षेत्र को खतरनाक मानता है जहां चीन आगे बढ़ रहा है। बुधवार को इंडो-पैसिफिक लैंड फोर्सेज कमांडर जनरल चार्ल्स फ्लिन ने कहा कि चीन की आधुनिक मिसाइलों का मुकाबला करने के उपायों का पता लगाने में अमेरिकी बलों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका निकट भविष्य में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मध्यम दूरी की मिसाइलें तैनात करने पर विचार कर रहा है।

भारत की हिंद-प्रशांत महासागर पहल का उद्देश्य भी एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। क्योंकि दुनिया का अधिकांश व्यापार संचार की समुद्री लाइनों पर निर्भर होने के कारण उनकी सुरक्षा बनाए रखना महत्वपूर्ण है। चूंकि व्यापार बड़े पैमाने पर महासागर के माध्यम से किया जाता है, इसलिए मजबूत समुद्री परिवहन सहयोग से हिंद-प्रशांत में देशों के भीतर और बीच शिपिंग नेटवर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। समुद्री क्षेत्र में सहयोग निकट भविष्य में भारत-अमेरिका संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन सकता है। साथ ही तेजी से सिर उठाते खतरों का सामना करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ख़ुफिया सूचना सहयोग को न सिर्फ सशक्त करने की ज़रूरत है, बल्कि इसे विभिन्न क्षेत्रों में फैलाने के लिए तमाम संभावनाओं को तलाशने की भी आवश्यकता है। 

यह भी पढ़े - मेरी व्यथा… डॉ. अतुल मलिकराम

भारत और अमेरिका खास तौर पर इंडो-पैसिफिक में महाद्वीपीय, समुद्र और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में संवेदनशील जानकारी साझा करने के साथ ही इंटेलिजेंस सेक्टर में आपसी सहयोग सशक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच मज़बूत होती भागीदारी ने खुफिया मामलों में आपसी सहयोग की संभावनाओं के ऐसे द्वारा खोलने का काम किया है जिनके बारे में दो दशक पहले सोचना भी मुमकिन नहीं था। जिस प्रकार से क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सुरक्षा को लेकर माहौल में बदलाव आ रहा है, उसके मद्देनज़र अमेरिका और भारत की खुफिया एजेंसियों के बीच सशक्त सहयोग बेहद ज़रूरी हो गया है।

समुद्री क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न प्रकार की जानकारियां आज के दौर में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए ख़ासी महत्वपूर्ण हो गई हैं। यही वजह है कि खुफिया जानकारी साझा करने का महत्व भी बहुत बढ़ गया है। इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक सफलता हासिल करने के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा, समुद्री लुटेरों का मुक़ाबला करना और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना बेहद अहम हो जाता है।

खबरें और भी हैं

Latest News

UPSC Result : बाराबंकी के दो बेटों ने बढ़ाया मान, पहले प्रयास में अभिजीत को 294वीं रैंक, अनुपम बने IRS UPSC Result : बाराबंकी के दो बेटों ने बढ़ाया मान, पहले प्रयास में अभिजीत को 294वीं रैंक, अनुपम बने IRS
बाराबंकी : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में बाराबंकी के दो होनहारों ने शानदार सफलता हासिल...
BCDA का ऐलान—जनस्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं, PACS को औषधि लाइसेंस देने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध
यूनेस्को के वर्ल्ड इंजीनियरिंग डे 2026 के लिए अदाणी ग्रुप बना आधिकारिक पार्टनर
राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को मिला ‘कार्बन फुटप्रिंट/जीएचजी अकाउंटिंग’ सर्टिफिकेशन
क्या अन्विता पूरी कर पाएगी अदालत की तीनों शर्तें और जीत पाएगी भाई-बहनों की कस्टडी? जानिए ‘इत्ती सी खुशी’ में
Copyright (c) Parakh Khabar All Rights Reserved.