भारत का बहिष्कार

इजराइल-गाजा युद्ध के बीच चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) शिखर सम्मेलन को तैयार है। इस दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चीन के नेताओं से बीजिंग में मुलाकात कर सकते हैं। उनकी यह यात्रा यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस के लिए चीन के समर्थन को रेखांकित करती है।

दोनों देशों ने अमेरिका और अन्य लोकतांत्रिक देशों के खिलाफ एक अनौपचारिक गठबंधन बना लिया है, जो इजराइल-हमास युद्ध से जटिल हो गया है। पुतिन यूक्रेन पर हमले के बाद अपने शासन को अंतर्राष्ट्रीय अलगाव में डालने के बाद किसी प्रमुख वैश्विक शक्ति की अपनी पहली यात्रा पर हैं। अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया के अन्य नेता ‘बेल्ट एंड रोड फोरम’ में भाग लेंगे। इसका मुख्य कार्यक्रम बुधवार को आयोजित होगा।

उभरती अर्थव्यवस्थाओं के नेता चीन की इस पहल के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक बैठक में भाग लेने के लिए बीजिंग पहुंच रहे हैं। इससे पहले चीन ने 2017 और 2019 में भी बीआरआई को लेकर दो सम्मेलन किए थे जिनसे भारत ने दूरी बनाए रखी थी।

भारत तीसरी बार भी चीन के बेल्ट एंड रोड फोरम में शामिल नहीं होगा। भारत बीआरआई का मुखर आलोचक रहा है। उसका स्पष्ट रूप से कहना है कि परियोजना सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय नियमों, सुशासन और कानून के राज के तहत संचालित होनी चाहिए और इसे लागू करने के दौरान खुलापन, पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता के सिद्धांत का अनुपालन किया जाना चाहिए। बीआरआई देशों को भारी कर्ज में डुबा रही है।

चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से गुजरने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) पर भी भारत की चिंता और विवाद को नजरअंदाज कर दिया है। चीन -पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और बलूचिस्तान से होकर गुजरता है, जो दोनों लंबे समय से चल रहे विद्रोह का घर हैं जहां इसे आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों का सामना करना पड़ता है।

सीपीईसी दक्षिण एशियाई क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हितों को बाधित करेगा और कश्मीर विवाद में पाकिस्तान की वैधता में भी मदद कर सकता है। साथ ही, सीपीईसी को अफगानिस्तान तक विस्तारित करने का प्रयास अफगानिस्तान के आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को कमजोर कर सकता है।

समझा जा रहा है कि सम्मेलन के जरिए चीन  बेल्ट एंड रोड परियोजना पर शक्ति प्रदर्शन करने जा रहा है। भारत का बहिष्कार विवादास्पद सीपीईसी में संप्रभुता के मुद्दों से जुड़ा है। भारत ने साफ कर दिया है कि संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।  

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