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शादी का झांसा देकर छात्रा से यौन संबंध बनाने के आरोपी अध्यापक की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शादी का झूठा वादा कर करीब एक दशक तक छात्रा से यौन संबंध बनाने के आरोपी अध्यापक के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द करने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी पहले से शादीशुदा था, ऐसे में विवाह का कथित वादा प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 के तहत “कपटपूर्ण साधन” की श्रेणी में आता है।
पीड़िता के अनुसार, वह वर्ष 2014-15 से आरोपी के संपर्क में थी। आरोपी ने उसे पत्नी की तरह साथ रखा, लेकिन विधिवत विवाह करने से हमेशा टालता रहा और केवल आर्य समाज मंदिर में शादी कराने की बात कही। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने के लिए उसके साथ मारपीट की और मामले की जानकारी किसी को देने पर बदनाम करने की धमकी दी।
पीड़िता का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद ही उसे पता चला कि आरोपी पहले से शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे भी हैं। वहीं, आरोपी की ओर से यह दलील दी गई कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे।
अदालत ने 13 जनवरी को दिए अपने फैसले में कहा कि आरोपी को शुरू से ही यह जानकारी थी कि वह पीड़िता से विवाह नहीं कर सकता, क्योंकि वह पहले से विवाहित था। ऐसे में यह स्पष्ट है कि विवाह का कथित वादा झूठा था और उसे शुरू से ही पूरा करना संभव नहीं था। अदालत ने इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी।
