इटावा के मुर्दाघर में तीन वर्षों से रखे महिला के शव का डीएनए लापता रीता से नहीं मिला

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इटावा के एक मुर्दाघर में पिछले तीन वर्षों से रखे गए एक महिला के शव की शिनाख्त के बारे में स्वत: संज्ञान लेने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट को सूचित किया कि इटावा के एक मुर्दाघर में पिछले तीन साल से रखे गए महिला के कंकाल के डीएनए के नमूने उस परिवार के नमूनों से मेल नहीं खाते हैं, जिसने दावा किया था कि यह अज्ञात शव उनकी बेटी रीता का है। 

सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि परिवार ने कंकाल पर दावा इस आधार पर किया था कि शव के पास मिले कुछ कपड़े उनकी बेटी के थे। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि डीएनए जांच में उन्हें कंकाल के जैविक माता-पिता नहीं मिले। इसके बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगामी 20 नवंबर 2023 को सुनिश्चित कर दी। 

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गौरतलब है कि इससे पूर्व 26 अक्टूबर को स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति अजय भनोट की खंडपीठ ने एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के आधार पर सरकार से इस मामले में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा था। 

मालूम हो कि एक परिवार ने दावा किया था कि शव उनकी लापता बेटी रीता का है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले की केस डायरी और जांच की स्थिति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा था। कोर्ट ने यह जानकारी भी उपलब्ध कराने को कहा था कि किस तिथि को जांच के नमूने लिए गए और उन्हें कब डीएनए जांच के लिए हैदराबाद स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा गया।

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