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Noida News: ग्रेटर नोएडा में फ्लैटेड फैक्ट्री बनाएगी योगी सरकार, MSME को मिलेगा नया बूस्ट
24 महीनों में होगा निर्माण कार्य पूरा, EPC मोड पर होगा प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश को "उद्यम प्रदेश" के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लक्ष्य के तहत योगी सरकार अब एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) को मजबूती देने के लिए अत्याधुनिक फ्लैटेड फैक्ट्री कॉम्पलेक्स तैयार करवा रही है।
24 महीने में तैयार होगी अत्याधुनिक फैक्ट्री
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, यह परियोजना EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मोड पर बनाई जाएगी और 24 महीने में निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। फैक्ट्री का ढांचा बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और तीन मंजिल का होगा, जो 38,665 वर्गमीटर क्षेत्रफल में फैला होगा। इसे 24 व 30 मीटर चौड़ी सड़कों के जरिये हाईवे से जोड़ा जाएगा।
MSME के लिए आधुनिक यूनिट्स और पूरी सुविधाएं
इस फ्लैटेड फैक्ट्री का मकसद छोटे और मझोले उद्योगों को एक ही परिसर में सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस यूनिट्स देना है ताकि उन्हें अलग से आधारभूत ढांचा खड़ा करने की जरूरत न पड़े। इसके तहत यूनिट्स में जल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था, फायर फाइटिंग सिस्टम, एलिवेटर, HVAC (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
सुरक्षा और पर्यावरण का भी रखा जाएगा ध्यान
परिसर की डिजाइन को ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा। CCTV कैमरे, एक्सेस कंट्रोल सिस्टम और अन्य निगरानी उपकरण भी लगाए जाएंगे ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, गेट, गार्ड रूम, इंटरनल रोड, पार्किंग, ड्रेनेज, सीवरेज और लैंडस्केपिंग का भी कार्य किया जाएगा।
रोजगार और निवेश दोनों को मिलेगा बढ़ावा
फ्लैटेड फैक्ट्री प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार का उद्देश्य न केवल MSME सेक्टर को गति देना है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और युवाओं को रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराना है। YEIDA का यह कदम निवेशकों को आकर्षित करेगा और ग्रेटर नोएडा को एक औद्योगिक हब के रूप में और मजबूत बनाएगा।
इस पूरे प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद तीन साल की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि भी लागू रहेगी, जिससे यूनिट धारकों को अतिरिक्त सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित की जा सकेगी।
योगी सरकार की यह पहल न सिर्फ उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि छोटे उद्यमियों को एक संगठित और अनुकूल माहौल देने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
