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बिना पंजीकरण संचालित एक दर्जन से ज्यादा मदरसों को नोटिस, जमीयत ने बताया गैरकानूनी
मुजफ्फरनगर: जिले में बिना 'उचित पंजीकरण' के संचालित एक दर्जन से अधिक मदरसों को नोटिस जारी कर दस्तावेज दिखाने को कहा गया है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने मदरसों को नोटिस जारी किए जाने को गैरकानूनी करार देते हुए इसका विरोध किया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि अगर ऐसे मदरसे खुले पाए गए तो इन पर प्रतिदिन 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने मदरसों को नोटिस जारी किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे गैरकानूनी करार दिया है। संगठन की उत्तर प्रदेश इकाई के सचिव मौलाना जाकिर हुसैन ने कहा कि एक खास समुदाय को निशाना बनाकर मदरसों को अवैध नोटिस जारी कर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मदरसे छात्रों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं और वे प्रतिदिन 10,000 रुपये का जुर्माना नहीं भर सकेंगे। प्रदेश के करीब चार हजार मदरसे अपने विदेशी वित्तपोषण को लेकर सरकार की नजर में हैं। राज्य सरकार ने 4,000 मदरसों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इनमें से ज्यादातर मदरसे नेपाल की सीमा पर स्थित हैं और उन्हें कथित तौर पर दूसरे देशों से धन मिल रहा है। इस संबंध में एक अधिकारी ने बताया कि एसआईटी इस बात की जांच करेगी कि कहीं इन मदरसों को प्राप्त धन का इस्तेमाल आतंकवाद या जबरन धर्म परिवर्तन जैसी किसी अवैध गतिविधि में तो नहीं किया गया।
