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आउटसोर्सिंग और संविदा भर्तियों में आरक्षण लागू करने की मांग, आरबी सिंह पटेल ने सरकार को घेरा
भोपाल, अगस्त 2026: अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आरबी सिंह पटेल ने सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग और संविदा के माध्यम से होने वाली भर्तियों में भी आरक्षण लागू करने की मांग की है। उन्होंने जातीय जनगणना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कहते हुए कहा कि सरकारी रोजगार में सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।
उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए इसे “कैंसर से भी खतरनाक” बताया और कहा कि यदि आउटसोर्सिंग से होने वाली सरकारी भर्तियों में ओबीसी और एससी/एसटी वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं मिला तो यह वंचित वर्गों के साथ अन्याय होगा।
जातीय जनगणना के आधार पर नीतियों की समीक्षा की मांग
पटेल ने कहा कि जातीय जनगणना से विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है। उनका कहना है कि इसके आंकड़ों के आधार पर आरक्षण संबंधी नीतियों की समीक्षा और निर्धारण किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पहले आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरियां रोजगार और सामाजिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम थीं। आउटसोर्सिंग बढ़ने से ऐसे अवसर सीमित होने की चिंता उन्होंने जताई।
संविदा कर्मचारियों के लिए भी आरक्षण की वकालत
आरबी सिंह पटेल ने संविदा कर्मचारियों के लिए भी आरक्षण की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग या संस्था में सरकार के अधीन काम हो रहा है और कर्मचारियों की नियुक्ति सरकारी व्यवस्था के माध्यम से की जा रही है, तो वहां सामाजिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी रोजगार नियमित, संविदा या किसी अन्य व्यवस्था के माध्यम से हो, संवैधानिक आरक्षण की भावना का सम्मान किया जाना चाहिए।
अखिल भारतीय न्यायिक सेवा की मांग
पटेल ने न्यायपालिका में वंचित और पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में सभी सामाजिक वर्गों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने पंचायत स्तर पर लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने की मांग की।
