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UP News: मध्यांचल में बिजली चोरी बड़ी समस्या, 98,840 मामलों में 1,229 करोड़ रुपये का बकाया, वसूली बनी चुनौती
लखनऊ : मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों में बिजली चोरी के मामलों ने निगम की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, मध्यांचल क्षेत्र में बिजली चोरी के कुल 98,840 मामले दर्ज हैं, जिनसे करीब 1,229 करोड़ रुपये का राजस्व बकाया है। इस भारी-भरकम राशि की वसूली निगम के अभियंताओं और विजिलेंस टीम के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इसके बाद 4 जनवरी 2026 से ओटीएस का दूसरा चरण लागू किया गया, जिसमें छूट की दर घटाकर 45 प्रतिशत कर दी गई। हालांकि, 21 जनवरी तक इस चरण में भी महज 5,000 बिजली चोरों ने ही पंजीकरण कर योजना का लाभ लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, कुल मामलों के मुकाबले अब तक केवल 15.1 प्रतिशत से भी कम लोगों ने ओटीएस का फायदा उठाया है।
इसका मतलब यह है कि अभी भी लगभग 83,000 बिजली चोरों से सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व वसूलना निगम के लिए एक कठिन कार्य बना हुआ है। विद्युत सप्लाई कोड के तहत, जिन मामलों में बकाया राशि जमा हो चुकी है, उनकी रिपोर्ट संबंधित थेफ्ट थानों को भेजकर मुकदमे समाप्त किए जाने और फाइनल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का दावा किया गया है।
निगम की प्रबंध निदेशक रिया केजरीवाल ने अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शेष बिजली चोरी के मामलों में राजस्व वसूली हर हाल में सुनिश्चित की जाए। हालांकि, अब तक बिजली चोरों से निगम को केवल 58 करोड़ रुपये का ही राजस्व प्राप्त हो सका है।
गौरतलब है कि ओटीएस योजना के तहत बिजली चोरी के मामलों में किसी भी किलोवाट क्षमता या उपभोक्ता श्रेणी का विभाजन नहीं किया गया है। यानी कोई भी उपभोक्ता, चाहे वह कितनी भी बिजली चोरी करता रहा हो, योजना का लाभ लेने के लिए पात्र है।
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले जिले:
लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बदायूं, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या (फैजाबाद), सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर और अमेठी।
